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मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Tuesday, October 2, 2012

मुहब्बतों को सलीक़ा सिखा दिया मैंने -Anjum Rahber.mp4

6 comments:

Rajesh Kumari said...

बहुत सुन्दर ग़ज़ल और प्रस्तुति दोनों के लिए दाद देती हूँ

प्रेम सरोवर said...

सुंदर गजल। मेरे नए पोस्ट "बहती गंगा" पर आप सादर आमंत्रित हैं। धन्यवाद।

Kunwar Kusumesh said...

best.

Neetu Singhal said...

सुई वुई भई निशुल्क भय यह भेषज देश |

Shikha Kaushik said...

nice

डा श्याम गुप्त said...

भाई ये ---मुहब्बतों --क्या शब्द होता है...??