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मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Friday, March 9, 2012

माँ-बाप को ही दे दिया इतना बड़ा धोखा !

माँ-बाप को ही दे दिया इतना बड़ा धोखा !
माँ-बाप जिन बच्चों को नाज़ों से पालते ;
होकर बड़े क्यों वे उन्हें घर से निकलते ?

बचपन में जिनसे पूछकर करते थे सभी काम ;
होकर बड़े उन्ही में कमियां निकालते !

लाचार हैं;बेबस हैं;किसी काम के नहीं ;
कहकर ये बात जले पर नमक हो डालते !

अपने तो शौक करते हो शान से पूरे ;
माँ-बाप के हर काम को कल पर टालते !

माँ-बाप को ही दे दिया इतना बड़ा धोखा ;
जो उम्रभर रहे तुमको सँभालते !

शिखा कौशिक

3 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

बहुत बढ़िया प्रस्तुति!
घूम-घूमकर देखिए, अपना चर्चा मंच
लिंक आपका है यहीं, कोई नहीं प्रपंच।।
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

Shikha Kaushik said...

hardik dhanyvad .
KAR DE GOAL

DR. ANWER JAMAL said...

Nice.