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मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Friday, July 1, 2011

त्रिपदा गज़ल....बात करें ...ड़ा श्याम गुप्त...

भग्न अतीत की न बात करें  |
व्यर्थ बात की क्या बात करें |
अब नवोन्मेष की बात करें  |

रेतीली  मरुभूमि, गरीबी ,
में कवि जीते हो सदियों से,
कुछ  हरियाली की बात करें |

यदि महलों में जीवन हंसता,
झोंपडियों में जीवन पलता ;
क्या उंच-नीच की बात करें |

शीश झुकाएं क्यों पश्चिम को,
क्यों अतीत से हम भरमाएं ;
कुछ  आदर्शों की  बात करें |

जीवन गम व खुशी दोनों है,
बात नहीं यदि कुछ बन् पाए;
कुछ भजन ध्यान की बात करें |

शास्त्र  बढे बूढ़े  औ वालक ,
है  सम्मान  देना-पाना तो;
मत 'श्याम व्यंग्य की बात करें ||

7 comments:

Shalini kaushik said...

शास्त्र बढे बूढ़े औ वालक ,
है सम्मान देना-पाना तो;
मत 'श्याम व्यंग्य की बात करें ||

bahut kuchh aapne sansarik prachalan ki bat ki hai kintu aisa hota nahi hai aur jahan jaisee sthiti ho vah karna hi padta hai ab jahan vyangya se bat hone yogya sthiti hogi vahan prashansa aur vah bhi shuddh nahi ho sakti,sundar prastuti par kuchh vivadon ko sath liye.badhai.

शिखा कौशिक said...

bahut khoob ...shyam ji .

रविकर said...

हाँ भाई बात कर-कर के
बड़े-बड़े सियासी हो या और,
मसले हल किये जारहे हैं--

हम भी बात करें--

prerna argal said...

जीवन गम व खुशी दोनों है,
बात नहीं यदि कुछ बन् पाए;
कुछ भजन ध्यान की बात करें |
bahoot khoob.badhaai

sushmaa kumarri said...

bhut khgubsurat....

डा श्याम गुप्त said...

धन्यवाद शालिनी ...
---चाहे जैसी स्थिति हो...शास्त्र व बड़े-बूढ़े ..व्यंग्य किये जाने के अधिकारी नहीं क्योंकि आप कभी भी उस अनुभव स्तर पर नहीं पहुँच सकते , यदि आपको अपनी बात कहानी है या कोई नयी बात या कुछ गलत लगता है तो उचित आदरभाव से कहना चाहिए....
---यदि बच्चों की बात है तो उन्हें उचित तरीके से समझाकर या डाट कर भी कहा जासकता है क्योंकि वे आपके स्तर के अनुभवी नहीं हैं ...पर व्यंग्य से कहने पर कथन का प्रभाव नहीं होगा....

डा श्याम गुप्त said...

@ धन्यवाद सुषमाजी, प्रेरणा जी,और शिखा जी ...

@ सही कहा रविकर जी...बातों से बड़े बड़े मसले हल हो जाते हैं ..परन्तु दोनों ओर हो आग बराबर लगी हुई ...