मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Monday, July 1, 2013

कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

orange rosesbouquet of spring roses 1


   न बदल पायेगा तकदीर तेरी कोई और ,
      तेरे हाथों में ही बसती है तेरी किस्मत की डोर ,
   अगर चाहेगा तो पहुंचेगा तू बुलंदी पर 
      तेरे जीवन में भी आएगा तरक्की का एक दौर .


तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने ,
    दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी .
 जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत ,
      कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .


तकदीर बनाने के लिए सुनले मेहरबां,
     दिल में जीतने का हमें जज्बा चाहिए .
छूनी है अगर आगे बढ़के तुझको बुलंदी 
      क़दमों में तेरे जोश और उल्लास चाहिए .


मायूस होके रुकने से कुछ होगा न हासिल ,
    उम्मीद के चिराग दिल में जलने चाहियें .
चूमेगी कामयाबी आके माथे को तेरे 
     बस इंतजार करने का कुछ सब्र चाहिए .


क्या देखता है बार-बार हाथों को तू अपने ,
   रेखाओं में नहीं बसती है तकदीर किसी की .
गर करनी है हासिल तुझे जीवन में बुलंदी 
   मज़बूत इरादों को बना पथ का तू साथी .

             शालिनी कौशिक 

                    [कौशल]

4 comments:

shikha kaushik said...

bahut khoob .

रविकर said...

सुन्दर प्रस्तुति-

आभार

madhu singh said...

आज मैं आप की धारदार लेखनी का इस्तेकबाल कर रही हूँ

Abhimanyu Bhardwaj said...

माई बिग गाइड पर सज गयी 100 वीं पोस्‍ट, बिना आपके सहयोग के सम्‍भव नहीं थी, मै आपके सहयोग, आपके समर्थन, आपके साइट आगमन, आपके द्वारा की गयी उत्‍साह वर्धक टिप्‍पणीयों, तथा मेरी साधारण पोस्‍टों व टिप्‍पणियों को अपने असाधारण ब्‍लाग पर स्‍थान देने के लिये आपका हार्दिक अभिनन्‍दन करता हॅू और आशा करता हॅू कि आपका सहयोग इसी प्रकार मुझे मिलता रहेगा, एक बार फिर ब्‍लाग पर आपके पुन आगमन की प्रतीक्षा में - माइ बिग गाइड और मैं