मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Tuesday, April 9, 2013

मुफ़लिस के बदन को भी है चादर की ज़रूरत

मुफ़लिस के बदन को भी है चादर की ज़रूरत
अब खुल के मज़ारों पे ये ऐलान किया जाए


1 comments:

Rajendra Kumar said...

बहुत ही बेहतरीन शेर....