मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Thursday, April 4, 2013

हर पार्टी ही रखे करिश्माई अदा है .

 

सियासत आज की देखो ज़ब्तशुदा है ,
हर पार्टी ही रखे करिश्माई अदा है .


औलाद कहीं बेगम हैं डोर इनकी थामे ,
जम्हूरियत इन्हीं के क़दमों पे फ़िदा है .


काबिल हैं सभी इनमे ,है सबमें ही महारत ,
पर घंटी बांधने को बस एक बढ़ा है .


इल्ज़ाम  धरें माथे ये अपने मुखालिफ के ,
पर रूप उनसे इनका अब कहाँ जुदा है .


आगे न इनसे कोई ,पीछे न खड़ा कोई ,
पर वोट-बैंक इनका अकीदत से बंधा है .

बाहर भी बैठते हैं ,भीतर भी बैठते हैं ,
मुखालफ़त का जिम्मा इनके काँधे लदा है .


जादू है ये सियासत अपनाई सब दलों ने ,
''शालिनी'' ही नहीं सबको लगती खुदा है .

            शालिनी कौशिक
                   [कौशल]

5 comments:

yashoda agrawal said...

आपकी यह बेहतरीन रचना शनिवार 06/04/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

yashoda agrawal said...

आपकी यह बेहतरीन रचना शनिवार 06/04/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

डॉ शिखा कौशिक ''नूतन '' said...

सार्थक प्रस्तुति . हार्दिक आभार हम हिंदी चिट्ठाकार हैं

Ashok Khachar said...

waaaah bhot khubsurat gazal hai

Ashok Khachar said...

waaaah bhot khubsurat gazal hai