मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Monday, December 31, 2012

आप उसे आवारा या बदचलन मत कह देना Modern Girl


एक तन्ज़ एक हक़ीक़त
किसी लड़की को आप रात गए किसी पब से या सिनेमा हॉल से निकलते देखें
या दिन दहाड़े किसी पार्क या खंडहर में किसी के साथ घुसते देखें तो
आप उसे आवारा या बदचलन मत कह देना
क्योंकि वह पढ़ी-लिखी है, समझदार है, जवान है, बालिग़ है
और तरक्क़ी कर रही है
वह ख़ुद को कितना भी सजाए,
अपना कुछ भी दिखाए,
चाहे ज़माने भर को रिझाए
चाहे उसकी आबरू ही क्यों न लुट जाए
आप उसे कभी ग़लत न कहना
दोष सिर्फ़ लड़कों को, समाज को, पुलिस और नेताओं को देना
ऐसा करके आप इज़्ज़त पाएंगे
समाज का चलन उल्टा है
सच से इसे बैर है।
आप सच कहेंगे तो ज़माना आपका दुश्मन हो जाएगा
जड़ों को पानी देकर यह शाख़ें कतरता है

Friday, December 28, 2012

वहाँ बच्चे तो होते हैं मगर बचपन नहीं होता

एक उर्दू शेर -
अफ़्लास की बस्ती में ज़रा जाकर तो देखो 
वहाँ बच्चे तो होते हैं मगर बचपन नहीं होता 


Sunday, December 9, 2012

फेर लेते हैं नज़र जिस वक़्त बेटे और बहू

चंद उर्दू शेर -

फेर लेते हैं नज़र जिस वक़्त बेटे और बहू 
अजनबी अपने ही घर में हाय बन जाती है माँ 
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यह पूरी नज़्म 'प्यारी माँ' ब्लॉग  पर है।

Thursday, December 6, 2012

ज़ाग़ों के तसर्रूफ़ में हैं उक़ाबों के नशेमन-Allama Iqbal



तंगनज़र आलिमों और नक़ली पीरों की हालत को देखकर अल्लामा इक़बाल का शेर याद आ रहा है-
मीरास में आई है इन्हें मसनदे इरशाद
ज़ाग़ों के तसर्रूफ़ में हैं उक़ाबों के नशेमन

ज़ाग़ का अर्थ - कौआ