मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Friday, December 28, 2012

वहाँ बच्चे तो होते हैं मगर बचपन नहीं होता

एक उर्दू शेर -
अफ़्लास की बस्ती में ज़रा जाकर तो देखो 
वहाँ बच्चे तो होते हैं मगर बचपन नहीं होता 


3 comments:

अरूण साथी said...

उफ्..................................

वीना said...

सच ही तो है...

प्रेम सरोवर said...

आपकी कविता मन के संवेदनशील तारों को झंकृत कर गई। मेरी कामना है कि आप अहर्निश सृजनरत रहें। मेरे नए पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा। न्यवाद।