मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Sunday, December 9, 2012

फेर लेते हैं नज़र जिस वक़्त बेटे और बहू

चंद उर्दू शेर -

फेर लेते हैं नज़र जिस वक़्त बेटे और बहू 
अजनबी अपने ही घर में हाय बन जाती है माँ 
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यह पूरी नज़्म 'प्यारी माँ' ब्लॉग  पर है।

5 comments:

डॉ शिखा कौशिक ''नूतन '' said...

सार्थक प्रस्तुति . हार्दिक आभार हम हिंदी चिट्ठाकार हैं

शालिनी कौशिक said...

तो फिर टिप्पणी भी प्यारी माँ पर ही बधाई भारत पाक एकीकरण -नहीं कभी नहीं

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

घूम-घूमकर देखिए, अपना चर्चा मंच
। लिंक आपका है यहीं, कोई नहीं प्रपंच।।
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज सोमवार के चर्चा मंच पर भी है!
सूचनार्थ!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

घूम-घूमकर देखिए, अपना चर्चा मंच
। लिंक आपका है यहीं, कोई नहीं प्रपंच।।
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज सोमवार के चर्चा मंच पर भी है!
सूचनार्थ!

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी said...

वाह...सुन्दर भावपूर्ण ...बहुत बहुत बधाई...