मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Thursday, December 6, 2012

ज़ाग़ों के तसर्रूफ़ में हैं उक़ाबों के नशेमन-Allama Iqbal



तंगनज़र आलिमों और नक़ली पीरों की हालत को देखकर अल्लामा इक़बाल का शेर याद आ रहा है-
मीरास में आई है इन्हें मसनदे इरशाद
ज़ाग़ों के तसर्रूफ़ में हैं उक़ाबों के नशेमन

ज़ाग़ का अर्थ - कौआ

4 comments:

शालिनी कौशिक said...

.बहुत सुन्दर v सार्थक अभिव्यक्ति .आभार माननीय कुलाधिपति जी पहले अवलोकन तो किया होता

रविकर said...

आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति शुक्रवार के चर्चा मंच पर ।।

डॉ शिखा कौशिक ''नूतन '' said...

nice

प्रेम सरोवर said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति। मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है। धन्यवाद।