मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Tuesday, October 9, 2012

लगेंगी सदियाँ पाने में .


लगेंगी सदियाँ पाने में ......
न खोना प्यार अपनों का लगेंगी सदियाँ पाने में ,
न खोना तू यकीं इनका लगेंगी सदियाँ पाने में .

नहीं समझेगा तू कीमत अभी बेहाल है मन में ,
अहमियत जब तू समझेगा लगेंगी सदियाँ पाने में .

नहीं बनता ये ऐसे ही कि चाहे जब बना ले तू ,
तू तोड़ेगा ये डूबेगा लगेंगी सदियाँ पाने में .

यकीं और प्यार का रिश्ता बनाया ऊपरवाले ने ,
हुनर पाना जो चाहे ये लगेंगी सदियाँ पाने में .

मिले जब प्यार अपनों का तो भर आती हैं ये आँखें ,
संभालेगा न गर इनको लगेंगी सदियाँ पाने में .

जो आये आँख में आंसू ''शालिनी ''पी जाना तू मन में ,
गिरा गर धरती पर आकर लगेंगी सदियाँ पाने में .
                   शालिनी कौशिक 

9 comments:

"अनंत" अरुन शर्मा said...

बेहद उम्दा ग़ज़ल शालिनी जी

DR. ANWER JAMAL said...

Nice.

नीरज गोस्वामी said...

शालिनी जी अच्छी रचना है लेकिन इसे ग़ज़ल कहने के लिए ग़ज़ल लेखन के कुछ नियम पालन करने होंगे...

नीरज

Kunwar Kusumesh said...

बेहतर है,शालिनी जी।
Carry on with some more study on its format.

Minakshi Pant said...

वाह बहुत खूब शालिनी जी |

vandana said...

बहुत सुन्दर शालिनी जी

yashoda agrawal said...

आपकी यह बेहतरीन रचना शनिवार 20/10/2012 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

Onkar said...

सुन्दर ग़ज़ल

Reena Maurya said...

बहुत बढियां गजल...
:-)