मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Monday, October 29, 2012

ताना -रीरी कर रहे हैं सियासतदां बैठे यहाँ .


तानेज़नी पुरजोर है सियासत  की  गलियों में यहाँ ,
ताना -रीरी कर रहे हैं  सियासतदां  बैठे यहाँ .

इख़्तियार मिला इन्हें राज़ करें मुल्क पर ,
ये सदन में बैठकर कर रहे सियाहत ही यहाँ .

तल्खियाँ इनके दिलों की तलफ्फुज में शामिल हो रही ,
तायफा बन गयी है देखो नेतागर्दी अब यहाँ .

बना रसूम ये शबाहत रब की करने चल दिए ,
इज़्तिराब फैला रहे ये बदजुबानी से यहाँ .

शाईस्तगी  को भूल ये सत्ता मद में चूर हैं ,
रफ्ता-रफ्ता नीलाम  हशमत मुल्क की करते यहाँ .

जिम्मेवारी ताक पर रख फिरकेबंदी में खेलते ,
इनकी फितरती ख़लिश से ज़ाया फ़राखी यहाँ .

देखकर ये रहनुमाई ताज्जुब करे ''शालिनी''
शास्त्री-गाँधी जी जैसे नेता थे कभी यहाँ .

शब्दार्थ :-तानेजनी -व्यंग्य ,ताना रीरी -साधारण गाना ,नौसीखिए का गाना
तलफ्फुज -उच्चारण ,सियाहत -पर्यटन ,तायफा -नाचने गाने आदि का व्यवसाय करने वाले लोगों का संघटित दल ,रसूम -कानून ,शबाहत -अनुरूपता  ,इज़्तिराब-बैचनी  ,व्याकुलता   ,शाईस्तगी-शिष्ट  तथा सभ्य होना ,हशमत -गौरव  ,ज़ाया -नष्ट  ,फ़राखी -खुशहाली

शालिनी कौशिक
[कौशल ]

10 comments:

रविकर said...



-बढ़िया ।।

DR. ANWER JAMAL said...

Nice.

Rohitas ghorela said...

कमाल की रचना

डॉ शिखा कौशिक ''नूतन '' said...

सार्थक सन्देश प्रेषित करती रचना हेतु बधाई

"अनंत" अरुन शर्मा said...

बेहतरीन बेहद खूबसूरत ग़ज़ल

Devdutta Prasoon said...

'दौरे सियासत' में 'ये लीग'पाप' का अचार
खाते हैं |
'भ्रष्टाचार'ही पहनते हैं, और 'भ्रष्टाचार'
खाते हैं ||

Devdutta Prasoon said...

'दौरे सियासत' में येलोग 'पाप का अचार' खाते हैं|
'भ्रष्टाचार'पहनते हैं,और 'भ्रष्टाचार' खाते हैं ||

Devdutta Prasoon said...

'दौरे सियासत' की खामियों पर चोट अच्छी है |
'सियासती शैतानियों' पर चोट अच्छी है ||

प्रेम सरोवर said...

दीपावली की अनंत शुभकामनाएँ!!

शालिनी कौशिक said...

utsahvardhan hetu aap sabhi ka aabhar.