मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Tuesday, October 2, 2012

कृतज्ञ दुनिया इस दिन की .


एक की लाठी सत्य अहिंसा एक मूर्ति सादगी की,
दोनों ने ही अलख जगाई देश की खातिर मरने की  .

जेल में जाते बापू बढ़कर सहते मार अहिंसा में ,
आखिर में आवाज़ बुलंद की कुछ करने या मरने की .

लाल बहादुर सेनानी थे गाँधी जी से थे प्रेरित ,
देश प्रेम में छोड़ के शिक्षा थामी डोर आज़ादी की .

सत्य अहिंसा की लाठी ले फिरंगियों को भगा दिया ,
बापू ने अपनी लाठी से नीव जमाई भारत की .

आज़ादी के लिए लड़े वे देश का नव निर्माण किया ,
सर्व सम्मति से ही संभाली कुर्सी प्रधानमंत्री की .

मिटे गुलामी देश की अपने बढ़ें सभी मिलकर आगे ,
स्व-प्रयत्नों से दी है बढ़कर साँस हमें आज़ादी की .

दृढ निश्चय से इन दोनों ने देश का सफल नेतृत्व किया
ऐसी विभूतियाँ दी हैं हमको कृतज्ञ दुनिया इस दिन की .

शालिनी कौशिक
[कौशल]

8 comments:

डॉ शिखा कौशिक ''नूतन '' said...

shat shat naman in vibhootiyon ko

डा. श्याम गुप्त said...

दोनों विभूतियों को नमन....

--पर ये गज़ल कहाँ है...

Sadhana Vaid said...

भारत देश इन दोनों महान विभूतियों का कृतज्ञ है और आज उनके जन्मदिवस पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है !

शालिनी कौशिक said...

श्याम जी मैंने कब कहा कि ये ग़ज़ल है किन्तु मुशायरा पर गाँधी जी और शास्त्री की उपस्थिति क्या गुनाह है जन्मदिन इन विभूतियों का हो और मुशायरा इस अवसर से चूक जाये ये कम से कम मुझे तो बर्दाश्त नहीं .आपकी व् शिखा जी व् साधना जी की टिप्पणी हेतु आभार.

Kunwar Kusumesh said...

मैं भी इन दोनों महान विभूतियों को नमन करता हूँ.

DR. ANWER JAMAL said...

मुशायरा गाँधी जी और शास्त्री की उपस्थिति से चूक जाये ये कम से कम मुझे तो बर्दाश्त नहीं ."

Nice.

Agree.

Aditi (Poonam) said...

दोनों महान विभूतियों को मेरा श्रध्हा-नमन

प्रेम सरोवर said...

मिटे गुलामी देश की अपने बढ़ें सभी मिलकर आगे ,
स्व-प्रयत्नों से दी है बढ़कर साँस हमें आज़ादी की .

बहुत अच्छा लगा । मेरे नए पोस्ट 'बहती गंगा" पर आपका इंतजार रहेगा। धन्यवाद।