मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Monday, October 1, 2012

इसलिए राहुल सोनिया पर ये प्रहार किये जाते हैं .

इसलिए राहुल सोनिया पर ये प्रहार किये जाते हैं .
Sunita Williams
जगमगाते अपने तारे गगन पर गैर मुल्कों के ,
तब घमंड से भारतीय सीने फुलाते हैं .
टिमटिमायें दीप यहाँ आकर विदेशों से ,
धिक्कार जैसे शब्द मुहं से निकल आते हैं .

नौकरी करें हैं जाकर हिन्दुस्तानी और कहीं ,
तब उसे भारतीयों की काबिलियत बताते हैं .
करे सेवा बाहर से आकर गर कोई यहाँ ,
हमारी संस्कृति की विशेषता बताते हैं .
Sonia Gandhi, Rahul Gandhi and Prime Minister Manmohan Singh look at newly elected party state presidents of the Indian Youth Congress seek blessings at a convention in New Delhi. Sonia in action
राजनीति में विराजें ऊँचे पदों पे अगर ,
हिन्दवासियों के यशोगान गाये जाते हैं .
लोकप्रिय विदेशी को आगे बढ़ देख यहाँ ,
खून-खराबे और बबाल किये जाते हैं.
Demonstrators from the Samajwadi Party, a regional political party, shout slogans after they stopped a passenger train during a protest against price hikes in fuel and foreign direct investment (FDI) in retail, near Allahabad railway station September 20, 2012 (Reuters / Jitendra Prakash)
क़त्ल होता अपनों का गैर मुल्कों में अगर ,
आन्दोलन करके विरोध किये जाते हैं .
अतिथि देवो भवः गाने वाले भारतीय ,
इनके प्रति अशोभनीय आचरण दिखाते हैं .

विश्व व्यापी रूप अपनी संस्था को देने वाले ,
संघी मानसिकता से उबार नहीं पाते हैं .
भारतीय कहकर गर्दन उठाने वाले ,
वसुधैव कुटुंबकम कहाँ अपनाते हैं

भारत का छोरा जब गाड़े झंडे इटली में ,
भारतीयों की तब बांछें खिल जाती हैं .
इटली की बेटी अगर भारत में बहु बने ,
जिंदादिल हिंद की जान निकल जाती है .

अलग-अलग मानक अपनाने वाले ये देखो ,
एक जगह एक जैसे मानक अपनाते हैं ,
देशी हो विदेशी हो भारत की या इटली की ,
बहुओं को सारे ये पराया कह जाते हैं .

मदर टेरेसा आकर घाव पर लगायें मरहम ,
सेवा करवाने को ये आगे बढ़ आते हैं .
सोनिया गाँधी जो आकर राज करे भारत पर ,
ऐसी बुरी हार को सहन न कर पाते हैं.
The dead Indira Gandhi with her son, Prime Minister Ranjiv Ghandi.
सारा परिवार देश हित कुर्बान किया ,
ऐसी क़ुरबानी में ये ढूंढ स्वार्थ लाते हैं .
नेहरु गाँधी परिवार की देख प्रसिद्धि यहाँ ,
विरोधी गुट सारे जल-भुन जाते हैं .
सोनिया की सादगी लुभाए नारियों को यहाँ ,
इसीलिए उलटी सीधी बाते कहे जाते हैं .
पद चाह छोड़कर सीखते जो ककहरा ,
राहुल के सामने खड़े न हो पाते हैं .

राजनीति में विराजें कितने ही अंगूठा टेक ,
पीछे चल जनता उन्हें सर पर बैठाती है .
राहुल गाँधी कर्मठता से छा न जाये यहाँ कहीं ,
उनकी शिक्षा को लेकर हंसी करी जाती है .
भेदभाव भारत में कानूनन निषिद्ध हुआ ,
लोग पर इसे ही वरीयता दिए जाते हैं
योग्यता और मेहनत को मिलता तिरस्कार यहाँ ,
इसलिए राहुल सोनिया पर ये प्रहार किये जाते हैं .
शालिनी कौशिक
[कौशल ]

9 comments:

डॉ शिखा कौशिक ''नूतन '' said...

sateek likha hai .badhai .

DR. ANWER JAMAL said...

सुन्दर प्रस्तुति!

Dr. shyam gupta said...
This comment has been removed by the author.
Dr. shyam gupta said...

---कविता व्यर्थ का एवं बड़ा सुन्दर चारण-गीत है..

---हाँ यह भेद-भाव तो हो ही रहा है कि.. पढ़े-लिखे वरिष्ठ जनों के कांग्रेस में होते हुए राहुल जैसे अत्यल्प अनुभवी व कम पढ़े लिखे को आगे बढ़ाया जा रहा है एवं कम पढ़ी-लिखी सोनिया को कांग्रेस का अध्यक्ष बना दिया गया है...
---गलती तो कांग्रेस में भरे हुए मूर्ख लोगों/ नेताओं की है...


--- सही बात है अपने सितारे विदेशी गगन पर जगमगाएंगे तो क्यों न सेना फुलाया जाए...
---और विदेशी यहाँ टिमटिमायें और अपने को तीसमार खान बताएं तो धिक्कार तो होना ही चाहिए ..
----क़त्ल हो अपनों का गैर मुल्कों में तो विरोध-आंदोलन तो होना ही चाहिए इसमें गलत क्या है...क्या अतिथी को कुछ भी करने का अधिकार है???
--- संघी मानसिकता के बारे में लेखक क्या जानता है...क्या है संघी मानसिकता ?

--- मदर टेरेसा ने अपने देश में घावों पर मरहम क्यों नहीं लगाया ..यहाँ क्यों ..??
--- राजनीति में कुर्बानी क्या दी गयी ...अपनी आकांक्षाएं-पूर्ति हित अपनी मूर्खताओं से अपनी ह्त्या करवाकर देश को लज्जित ही किया गया...
--जहां अभीतक भारतीय नागरिकता नहीं ली ...सादगी क्या???

October 1, 2012 12:48 PM

Rajesh Kumari said...

आपकी इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल २/१०/१२ मंगलवार को चर्चा मंच पर चर्चाकारा राजेश कुमारी द्वारा की जायेगी आप का स्वागत है

Virendra Kumar Sharma said...

अजी सितारा हो तो हम भी अर्घ्य चढ़ाएं .ब्लेक होल का क्या करें .चर्च के एजेंटों का क्या करें जिन्हें भारतीय राजनीति की काया पे जतन से रोपा गया है ?

सुशील said...

सटीक !

Virendra Kumar Sharma said...


मंगलवार, 2 अक्तूबर 2012
ये लगता है अनासक्त भाव की चाटुकारिता है .
विदुषियो ! यह भारत देश न तो नेहरु के साथ शुरु होता है और न खत्म .जो देश के इतिहास को नहीं जानते वह हलकी चापलूसी करते हैं .

रही बात सोनिया जी की ये वही सोनियाजी हैं जो बांग्ला देश युद्ध के दौरान राजीव जी को लेकर इटली भाग गईं थीं एयरफोर्स की नौकरी छुड़वा कर .

भारतीय राजकोष से ये बेहिसाब पैसा खर्च करतीं हैं अपनी बीमार माँ को देखने और उनका इलाज़ करवाने पर .

और वह मंद बुद्धि बालक जब जोश में आता है दोनों बाजुएँ ऊपर चढ़ा लेता है गली मोहल्ले के गुंडों की तरह .

उत्तर प्रदेश के चुनाव संपन्न होने के बाद कोंग्रेस की करारी हार के बाद भी इस बालक ने बाजुएँ चढ़ाकर बोलना ज़ारी रखा -मैं आइन्दा भी उत्तर प्रदेश के खेत खलिहानों में

आऊँगा .इस कुशला बुद्धि बालक के गुरु श्री दिग्विजय सिंह जी को बताना चाहिए था -बबुआ चुनाव खत्म हो गए अब इसकी कोई ज़रुरत नहीं है .

इस पोस्ट में जो भाषा इस्तेमाल की गई है उसका भारतीय भाषा से कोई तालमेल नहीं है .यह चरण- चाटू भाषा है जो कहती है लाओ अपने चरण जीभ से चाटूंगी .सीधी- सीधी

चापलूसी है इस भाषा में कोई भी दो पंक्ति ले लीजिए पहली पंक्ति सामान्य रूप से कही जाती है ,दूसरी में ज़बर्ज़स्ती कीलें ठोक दी जातीं हैं किले खड़े कर दिए जातें हैं ..हरेक

पंक्ति के बीच यात्रा राहुल सोनिया के बीच की जाती है .एक छोर पर राहुल दूसरे पर सोनिया .

जिन्हें इतिहास का पता नहीं बलिदान का पता नहीं जिन्हें ये नहीं पता इस मुल्क के महाराष्ट्र जैसे राज्यों के तो कुल के कुल बलिदान हो गए,अनेक पीढियां हैं बलिदानी

.सावरकर को उम्र भर की सजाएं मिलीं .पंजाब में गुरुओं ने क्या जुल्म न सहे .क्या क्या कुर्बानी देश के लिए न दीं.

औरतें तो इस देश में खुद्द्दार हुआ करतीं थीं .चाटुकारिता कबसे करने लगीं? पुरुष बाहर रहता था उसे बेचारे को कई तरह के समझौते करने पड़ते थे .महिलाएं चारणगीरी नहीं

करतीं थीं .

और फिर चाटुकारिता के भी आलंबन होते थे .जिसकी चाटुकारिता की जाती थी उसमें कुछ गुण होते थे .जो योद्धा होते थे उनकी वीरता का यशोगान कर उनमें जोश भरा जाता

था .चाटुकारिता निश्चय ही राजपरिवारों के प्रति रही आई है .लेकिन इस पाए की नहीं .

लेकिन जिसे भारत की संस्कृति भाषा भूगोल आदि का ज़रा भी ज्ञान नहीं जिसका कोई कद और मयार नहीं वह आलंबन किस काम का .

ये लगता है अनासक्त भाव की चाटुकारिता है .

गीता में अनासक्त भाव की भक्ति का योग है .लेकिन जिस भक्ति भाव और तल्लीनता से यह चाटुकारिता की गई है वह श्लाघनीय है

भले यह स्तुति इनका वैयक्तिक

मामला हो .

सन्दर्भ -सामिग्री :-


Monday, October 1, 2012
इसलिए राहुल सोनिया पर ये प्रहार किये जाते हैं .
इसलिए राहुल सोनिया पर ये प्रहार किये जाते हैं

devendra gautam said...

nazm achchhi hai lekin iske kathy se main sahmat nahi'n hun.