मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Tuesday, August 21, 2012

अपने क़लम के लिए लिखो Nice Hindi Poem

प्रिय
ऐसे में आखिर लिखे अब क्यों कोई, क्या आप बतलाओगे मुझे ?

क्या लिखना ?
किसके लिए लिखना ?
अक्सर ऐसे सवाल झिंझोड़ते हैं मन को
सही है , मगर
हर शै वक्फ़ है
अपने मक़सद के लिए
दिमाग़ सोचने के लिए
दिल मानने के लिए
ज़ुबां बोलने के लिए
और क़लम लिखने के लिए
न लिखा जाएगा तो
मर जाएगा क़लम
मर जाएगा दिल ओ दिमाग़
और मर जाएगी ज़ुबां भी
मर जाएगी सोच और
मर जाएगी इंसानियत भी
इंसानियत को बचाना है तो
बचाना होगा ख़ुद को
बचाना होगा अपने क़लम को
किसी के लिए न सही
अपने लिए लिखो
अपने क़लम के लिए लिखो
लिखोगे तो पढेंगे पढ़ने वाले
जो पढ़कर बोलते नहीं हैं
बल्कि सोचते हैं
असल क़द्रदान यही हैं
हौसला कभी कम न हो
कभी बेकार ग़म न हो
दुआ हमारी यही है

कविता अच्छी लगी.
ईद मुबारक .
प्रिय

ऐसे में आखिर लिखे अब क्यों कोई, क्या आप बतलाओगे मुझे ?

.
.
.
शब्द
शायद
अब खुद ही भूल गये हैं
कि आपस में जुड़ कर
किसी खास क्रम में 
देते एक दूसरे को सहारा
और विस्तार भी
कभी हो जाते थे
वह बहुत प्रभावी
और ताकतवर भी
रखने लगते थे हैसियत
बदल देने की
दुनिया के निजाम को
शब्द
भले ही महज दो या चार हों
बन जाते थे वह नारा
जो जिंदा कर देता था
मरी हुई कौमों को
पलट देता था तख्तो-ताज
बहाता था बदलाव की बयार
शब्द 
किसी खास की वाणी से
उच्चारित होकर
फैल जाते थे हर तरफ
बन जाते थे उम्मीदें
दिखाने लगते थे सपने
और जीने का मकसद भी

शब्द
जो दिलाते थे भरोसा
और दिलोदिमाग को सुकून
भले ही आज सब कुछ
हो रहा हो गलत-अनैतिक
पर हो जायेगा ठीक यह
बस कुछ दिनों की बात है
शब्द
जो देते थे आश्वासन सा
भले ही दिख रहा हो
हर तरफ हर कोई स्याह सा
पर निराश नहीं होना दोस्त
फिर रोशन होगा जहाँ
सच्चाई अभी जिंदा है

शब्द 
महज शब्द हो गये हैं
कौड़ियों के मोल मिलते
ईमान के बदले बिकते
किसी भी क्रम में लगाओ
अलंकार उपमायें जुटाओ
अब वे कोई अर्थ नहीं रखते

शब्द
खो चुके हैं ताकत अपनी
नहीं ला पाते हैं बदलाव
अब नहीं दिलाते उम्मीद
आश्वस्त तक नहीं करते
नहीं कहते कि सुबह आयेगी
बिकते हैं चौराहों-फुटपाथों पर
शब्द
अब हो गये हैं अर्थहीन
और नपुंसक भी
ऐसे में क्या लिखना
किसके लिये लिखना
आखिर लिखे क्यों अब कोई
क्या तुम बतलाओगे मुझे ?

8 comments:

रविकर फैजाबादी said...

उत्कृष्ट प्रस्तुति बुधवार के चर्चा मंच पर ।।

प्रवीण शाह said...

.
.
.
पसंद आया आपका यह जवाब...

आभार!



...

शिखा कौशिक 'नूतन ' said...

NICE

yashoda agrawal said...

आपकी यह बेहतरीन रचना शनिवार 25/08/2012 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

HAKEEM YUNUS KHAN said...

Nice answer.

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

कविता के साथ जवाब बेहतरीन

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

बहुत ही बढ़िया


सादर

Kuldeep Sing said...

nice post, please read my blog http://www.kuldeepkikavita.blogspot.com and give your comments about my poems.