मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Monday, August 6, 2012

अन्ना टीम :वहीँ नज़र आएगी.



अन्ना टीम :
वहीँ नज़र आएगी.




शेखी बखारने वालों की फ़िलफौर शामत आएगी,
रफ्ता-रफ्ता सामने पुख्ता हक़ीकत आएगी.

आगाज़ कर रहे थे जो रहनुमा बनकर यहाँ,
रहनुमाई वही अब सियासत में रंगकर आएगी.

तोहमतें लगा रहे थे आज के नेताओं पर ,
है ग़नीमत सियासत की कुछ समझ तो आएगी.

मुबतला रहते थे ये अशखास से शबो-रोज़,
वोट देने के लिए न शक्ल नज़र आएगी.

खिदमतें जो हो रही आरास्ता कर अंजुमन,
इत्तहाद वह नज़र कहीं नहीं आएगी.

अवाम-सियासत ही दोनों करप्शन में हैं रंगे .
खुदगर्ज़ जनता कैसे खलल बन आएगी.

फिरकेबंदी में फंसे हैं जैसे सारे दल यहाँ,
अन्ना टीम ''शालिनी''को वहीँ नज़र आएगी.


                 शालिनी कौशिक 
                            [कौशल]

 शब्द  - अर्थ  -फ़िलफौर-तुरंत ,शामत-विपत्ति,शेखी -घमंड ,मुब्तला-घिरे रहना ,
इत्तेहाद-एकता,आरास्ता-सजाना ,फिरकेबंदी-दलबंदी 

4 comments:

Kunwar Kusumesh said...

खूब लिख रही हैं आजकल,शालिनी जी.
वैसे:-
मैं तो बड़ा निराश हूँ अन्ना की टीम से.
इस दर्जा पलट जायेंगे सोंचा कभी न था.
उनको थी राजनीति से हरवक्त एलर्जी.
उनकी नज़र में काम ये अच्छा कभी न था.

DR. ANWER JAMAL said...

बहुत अच्छा कहा.

yashoda agrawal said...

शनिवार 11/08/2012 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. आपके सुझावों का स्वागत है . धन्यवाद!

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

समसामयिक गजल .... देखते हैं की सियासत में अन्ना टीम क्या रंग लाती है