मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Sunday, August 12, 2012

उन्हें पढ़ना नहीं आता

बहुत अरमान हैं दिल में, हमें गढ़ना नहीं आता
पहाड़ों की कठिन मंजिल, हमें चढ़ना नहीं आता

सितारे टिमटिमाते हैं, मगर है चाँदनी गायब
अन्धेरे में सही पथ पर, हमें बढ़ना नहीं आता

हमारी ताक में दुश्मन, छिपे बैठे हैं झुरमुट में
बिना हथियार के उनसे, हमें लड़ना नहीं आता

समझती ही नहीं है अब नजर, नजरों की भाषा को
हमें लिखना नहीं आता, उन्हें पढ़ना नहीं आता

फटे ढोलक के ताले हैं, सुरों का रूप ओझल है
नई सी खाल तबले पर, हमें मढ़ना नहीं आता

14 comments:

DR. ANWER JAMAL said...

आपका हार्दिक स्वागत है.

रचना वाक़ई काबिले तारीफ़ है.

safat alam taimi said...

बहुत खूब डा. साहब

रविकर फैजाबादी said...

उत्कृष्ट प्रस्तुति सोमवार के चर्चा मंच पर ।।

prerna argal said...

समझती ही नहीं है अब नजर, नजरों की भाषा को
हमें लिखना नहीं आता, उन्हें पढ़ना नहीं आता
बहुत ही सुंदर भाव से लिखी सार्थक रचना /बहुत बधाई आपको /

मेरे ब्लॉग में आपका स्वागत है /जरुर पधारें /

Reena Maurya said...

बहुत सुन्दर गजल..
समझती ही नहीं है अब नजर, नजरों की भाषा को
हमें लिखना नहीं आता, उन्हें पढ़ना नहीं आता
ये पंक्तियाँ तो बहुत ही लाजवाब है...
:-)

सुशील said...

समझती ही नहीं है अब नजर, नजरों की भाषा को
हमें लिखना नहीं आता, उन्हें पढ़ना नहीं आता

सुंदर है
पर हमें सच में ही नहीं आता
आपको कौन है ये आकर बताता ?

amrendra "amar" said...

वाह बहुत खूब

Mukesh Kumar Sinha said...

wah:)

दिगम्बर नासवा said...

हमारी ताक में दुश्मन, छिपे बैठे हैं झुरमुट में
बिना हथियार के उनसे, हमें लड़ना नहीं आता ..

वाह ... लाजवाब शेर हैं सभी .. और मस्त गज़ल है ...

sushma 'आहुति' said...

bhaut hi umda.....

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) said...

परखते हैं नगीनों को , नहीं हम जौहरी तो क्या
ये नकली नग अंगूठी में, हमें जड़ना नहीं आता ||

लिखा तो कुछ नहीं होगा,छुआ तो प्यार से होगा
कहा किसने,छुअन उनकी, हमें पढ़ना नहीं आता ||

yashoda agrawal said...

आपकी यह बेहतरीन रचना शनिवार 18/08/2012 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

शानदार गजल है सर!


सादर

ana said...

bahut hi achchhi kavita....hame likhna nahi ata