मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Sunday, July 8, 2012

मंज़िल पास आएगी.


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हौसले कर बुलंद अपने ,मंज़िल पास आएगी,
जोश भर ले दिल में अपने मंज़िल पास आएगी.

तक रहा है बैठकर क्यों भागती परछाइयाँ ,
उठ ज़रा बढ़ ले तू आगे मंज़िल पास आएगी.

दूसरों का देखकर मुंह न पायेगा फ़तेह कभी ,
रख ज़रा विश्वास खुद पर मंज़िल पास आएगी.

भूल से भी मत समझना खुद को तू सबसे बड़ा,
सर झुका मेहनत के आगे मंज़िल पास आएगी.

गर नशा करना है तुझको चूर हो जा काम में ,
लक्ष्य का पीछा करे तो मंज़िल पास आएगी.

''शालिनी'' कहती है तुझको मान जीवन को चुनौती ,
बिन डरे अपना ले इसको मंज़िल पास आएगी.

                              शालिनी कौशिक 
                                    [कौशल ]

5 comments:

Dr. Ayaz Ahmad said...

''शालिनी'' कहती है तुझको मान जीवन को चुनौती ,
बिन डरे अपना ले इसको मंज़िल पास आएगी.

Zaroor.

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

क्या बात है वाह!
आपकी यह ख़ूबसूरत प्रविष्टि कल दिनांक 09-07-2012 को सोमवारीय चर्चामंच-935 पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

आमिर दुबई said...

दूसरों का देखकर मुंह न पायेगा फ़तेह कभी ,
रख ज़रा विश्वास खुद पर मंज़िल पास आएगी.

वाह क्या बात है.बहुत सुन्दर रचना.


मोहब्बत नामा
मास्टर्स टेक टिप्स

शालिनी कौशिक said...

amir ji aur ayaz ji utsahvardhan hetu dhanyawad.

DR. ANWER JAMAL said...

damdaar aur asardaar hai apki rachna.