मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Tuesday, January 3, 2012

वस्ल के लिए पागल वो भी है और मैं भी हूँ


मुहब्बत में घायल वो भी है और मैं भी हूँ,
वस्ल के लिए पागल वो भी है और मैं भी हूँ,
तोड़ तो सकते हैं सारी बंदिशें ज़माने की,
लेकिन घर की इज्जत वो भी है और मैं भी हूँ,

{वस्ल = मिलन}

"ब्लॉगर्स मीट वीकली
(24) Happy New Year 2012"
में आयें .
आपको यहाँ कुछ नया और हट कर मिलेगा .

4 comments:

sangita said...

sundar najma hae.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

नववर्ष की हार्दिक मंगलकामनाओं के आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल बुधवार के चर्चा मंच पर भी होगी!

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

सुन्दर प्रस्तुति

Sanju said...

बहुत बेहतरीन पोस्ट है सर आपकी
मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।