मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Sunday, January 1, 2012

वो लोग और होंगे जो हारे है मुहब्बत मे

आज अपने ब्लॉग ‘वेद क़ुरआन‘ के फ़ालोअर्स पर नज़र डाली तो वहां जावेद साहब का नाम नज़र आया। हम उनके ब्लॉग पर गए तो आपके लिए यह रचना ले आए।
आप भी देखें-

चंद अल्फाज़ो मे भला कैसे समेटू मैं बता....


चंद अल्फाज़  मे भला कैसे समेटू मैं बता
मेरा इश्क़ कोई ग़ज़ल नही एक पाक सिपारा है

नही लिपटे है इसमे चाँद सितारे फिर भी
यही मेरी इबादत यही जन्नत का नज़ारा है

दर्द भी,जुदाई भी और दुनिया के हैं मरहले
फिर भी हर आयात को इसकी दिल मे उतारा है

कितनी दुआए की है खुदा से,रातो को जाग कर
कैसे बताए कितनी सिद्दत से इसको सँवारा है

वो लोग और होंगे जो हारे है मुहब्बत मे
मैने तो गम उठा के इसे और निखारा है

पा कर के साथ उसका “जावेद” ने ये जाना है
ज़िंदगी उसके साथ हो तो फिर पीराने बहाराँ है

*पीराने बहाराँ= बहार लाने वाला

7 comments:

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

आप तथा आपके परिवार के लिए नववर्ष की हार्दिक मंगल कामनाएं
आपके इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 02-01-2012 को सोमवारीय चर्चा मंच पर भी होगी। सूचनार्थ

sangita said...

आज इस ब्लॉग पर जावेद अख्तर जी की नज्म पढ़ कर अच्छा लगा | उनकी नज्म पर कोई टिपण्णी करना सूरज को दिया दिखाना होगा | आपसे अनुरोध है की यदि राहत-इन्दौरी जी की कुछ कवितायेँ या शेर भी उपलब्ध करा सकें |

वन्दना said...

शानदार प्रस्तुति…………
नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं.

veerubhai said...

अच्छी ग़ज़ल हर अशआर काबिले दाद .

Reena Maurya said...

वो लोग और होंगे जो हारे है मुहब्बत मे
मैने तो गम उठा के इसे और निखारा है
अति उत्तम प्रभावशाली रचना है...
नववर्ष कि शुभकामनाये

Sonit Bopche said...

"नही लिपटे है इसमे चाँद सितारे फिर भी
यही मेरी इबादत यही जन्नत का नज़ारा है..."

"वो लोग और होंगे जो हारे है मुहब्बत मे
मैने तो गम उठा के इसे और निखारा है"
...wah atyant umda sher evem prabhavshali rachna..

kalpana fans club said...

http://javedkikalamse.blogspot.in/2010/05/blog-post_12.html#comment-form
es rachana pe pratikriya sidhe lekhak ko den to use protsahan milega