मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Saturday, January 28, 2012

चाँदनी भी कहर सा ढाती है


जब भी पुरवा बयार आती है
ज़िन्दगी खूब खिलखिलाती है

जब भी बादल फलक घिरते हैं
याद प्रीतम की तब सताती है

जब भी भँवरे गुहार करते हैं
तब कली ग़ुल सा मुस्कराती है

सर्दियाँ शीत जब उगलतीं हैं
चाँदनी भी कहर सा ढाती है

ज़िन्दगीभर सफर में रहना है
मंज़िलें हाथ नहीं आती है

“रूप” रहता नहीं सलामत है
धूप यौवन की ढलती जाती है

14 comments:

sushma 'आहुति' said...

बहुत ही खुबसूरत
और कोमल भावो की अभिवयक्ति......

Vaanbhatt said...

क्या बात है...जिंदगी भर सफ़र में रहना है....

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति
आपकी इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 30-01-2012 को सोमवारीय चर्चामंच पर भी होगी। सूचनार्थ

sangita said...

कोमल भावों की अभिव्यक्ति |

ऋता शेखर मधु said...

बहुत सुंदर प्रस्तुति|

DR. ANWER JAMAL said...

बेहतरीन ,
आभार !!

Please See :
ब्लॉगर्स मीट वीकली (28) God in Ved & Quran
http://hbfint.blogspot.com/2012/01/28-god-in-ved-quran.html

वन्दना said...

sundar bhavaavyakti.

सदा said...

वाह ...बहुत बढि़या।

अनुपमा पाठक said...

वाह!

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) said...

छोटी छोटी पंक्तियों में इतनी बड़ी बातें, वाह !!!

dinesh aggarwal said...

बेहतरीन भाव एवं सराहनीय रचना.....
कृपया इसे भी पढ़े-
नेता, कुत्ता और वेश्या

dinesh aggarwal said...

अति सुन्दर.....
कृपया इसे भी पढ़े-
नेता, कुत्ता और वेश्या

Piush Trivedi said...

Nice Blog , Plz Visit Me:- http://hindi4tech.blogspot.com ??? Follow If U Lke My BLog????

NISHA MAHARANA said...

bahut sundar.