मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Wednesday, December 14, 2011

शब भर रह़ा चर्चा तेरा

  • कल चौदहवीं की रात थी,
    शब भर रह़ा चर्चा तेरा |
    किसी ने कहा कि चाँद है,
    किसी ने कहा चेहरा तेरा |
    हम भ़ी वहीं मौजूद थे,
    ... हम से भ़ी सब पूछा किए |
    हम कुछ न बोले चुप रहे,
    मंज़ूर था परदा तेरा |

2 comments:

Kunwar Kusumesh said...

ये ग़ज़ल गुलाम अली साहब की आवाज़ में बहुत popular हो चुकी है.इसके शायर हैं इब्ने-इंशा(शेर मोहम्मद खान) साहब.

सागर said...

behtreen....