मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Saturday, December 10, 2011

आओ चुप्पी तोड़कर इन सबका भांडा फोड़ दें

न्याय की गद्दी पर बैठे व् न्याय दिलवाने वाले ही भ्रष्ट हो जायेंगे तो समाज को अपराध -अन्याय के गहरे गर्त में जाने से कौन रोक सकता है ?आज यह जरूरी हो गया है जनता सजग बने .अन्याय का विरोध करे -

जो कलम रिश्वत की स्याही से लिखे इंसाफ को
मुन्सिफों की उस कलम को आओ आज तोड़ दें .

जो लुटे इंसाफ की चौखट पे माथा टेककर;
टूटे हुए उनके भरोसे के सिरों को जोड़ दें .

कितने में बिकते गवाह; कितने में मुंसिफ बिक रहे
आओ चुप्पी तोड़कर इन सबका भांडा फोड़ दें .

इंसाफ की गद्दी पे बैठे हैं , इसे ही बेचते
सोयी हैं जिनकी रूहें आओ उन्हें झंकझोर दें .

जो जिरह के नाम पर लोगों की इज्जत तारते
ए शिखा !उनसे कहो कि वे वकालत छोड़ दें .

6 comments:

prerna argal said...

आप की पोस्ट आज की ब्लोगर्स मीट वीकली (२१)में शामिल की गई है /आप आइये और अपने विचारों से हमें अवगत करिए /आप हिंदी की सेवा इसी तरह करते रहें यही कामना है /आपका मंच पर स्वागत है /जरुर पधारें /लिंक है / http://hbfint.blogspot.com/2011/12/21-save-girl-child.html

प्रेम सरोवर said...

आपकी प्रस्तुति.बहुत ही खूबसूरत और प्रेरक है।
समय मिलने पर मेरे पोस्ट "साहिर लुधियानवी" पर आईयेगा । धन्यवाद ।

DR. ANWER JAMAL said...

आपकी प्रस्तुति.बहुत ही खूबसूरत और प्रेरक है।

amrendra "amar" said...

bahut hi umda prastuti

प्रेम सरोवर said...

आपका पोस्ट रोचक लगा । मेरे नए पोस्ट नकेनवाद पर आपका बेसब्री से इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।

Naveen Mani Tripathi said...

ak achhi gazal ... abhar kaushik ji.