मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Tuesday, November 29, 2011

"प्यारी-प्यारी बातें" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


बात-बात में हो जाती हैं, देखो कितनी सारी बातें।
घर-परिवार, देश-दुनिया की, होतीं सबसे न्यारी बातें।।

रातों में देखे सपनों की, दिन भर की दिनचर्या की भी,
सुबह-शाम उपवन में जाकर, होतीं प्यारी-प्यारी बातें।

बातों का नहीं ठौर-ठिकाना, बातों से रंगीन जमाना,
गली-गाँव चौराहे करते, मेरी और तुम्हारी बातें।

बातें ही तो मीत बनातीं, बातें बैर-भाव फैलातीं,
बातों से नहीं मन भरता है, सुख-दुख की संचारी बातें।

जाल-जगत के ढंग निराले, हैं उन्मुक्त यहाँ मतवाले,
ज्यादातर करते रहते हैं, गन्दी भ्रष्टाचारी बातें।

लेकिन कोश नहीं है खाली, सुरभित इसमें है हरियाली,
सींच रहा साहित्य सरोवर, उपजाता गुणकारी बातें।

खोल सको तो खोलो गठरी, जिसमें बँधी ज्ञान की खिचड़ी,
सभी विधाएँ यहाँ मिलेंगी, होंगी विस्मयकारी बातें।

नहीं “रूप” है, नहीं रंग है, फिर भी बातों की उमंग है,
कभी-कभी हैं हलकी-फुलकी, कभी-कभी हैं भारी बातें। 

15 comments:

DR. ANWER JAMAL said...

खोल सको तो खोलो गठरी, जिसमें बँधी ज्ञान की खिचड़ी,
सभी विधाएँ यहाँ मिलेंगी, होंगी विस्मयकारी बातें।

Waah ...

Sahi kaha aapne ...

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

अरे वाह! बहुत सुन्दर प्रस्तुति

वन्दना said...

वाह …………बहुत सुन्दर रचना।

रविकर said...

वाह!!! बहुत बहुत बधाई ||

प्रभावी कविता ||

सुन्दर प्रस्तुति ||

Ghotoo said...

bahut hi sundae aur prabhavit karti racna

कमलेश भगवती प्रसाद वर्मा said...

वाह क्या बात है ..सुंदर लेखन का मुजाहिरा उस्ताद जी की कलम से ...मुबारकबाद !

संतोष कुमार said...
This comment has been removed by the author.
संतोष कुमार said...

सुंदर रचना बेहद खूबसूरत !

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

अपने चर्चा मंच पर, कुछ लिंकों की धूम।
अपने चिट्ठे के लिए, उपवन में लो घूम।।

ज्ञानचंद मर्मज्ञ said...

सुन्दर प्रस्तुति !

ज्ञानचंद मर्मज्ञ said...

सुन्दर प्रस्तुति !

NISHA MAHARANA said...

बातें ही तो मीत बनातीं, बातें बैर-भाव फैलातीं,
बातों से नहीं मन भरता है, सुख-दुख की संचारी बातें।sachchi baten.

निर्मला कपिला said...

बातें ही तो मीत बनातीं, बातें बैर-भाव फैलातीं,
बातों से नहीं मन भरता है, सुख-दुख की संचारी बातें।
खोल सको तो खोलो गठरी, जिसमें बँधी ज्ञान की खिचड़ी,
सभी विधाएँ यहाँ मिलेंगी, होंगी विस्मयकारी बातें।

बहुत खूब। बधाई

avanti singh said...

वाह! बहुत ही उम्दा रचना ...बधाई स्वीकारें ...इतफाक से आज ही मैं ने भी एक इस ही तरह की कविता लिखी कुछ पंक्तियाँ पेश करती हूँ .......

बात गर हम शुरू कर भी दें तो , दुनिया, जहाँ की बातें करते है
कौन कैसा है ,वो तो वैसा है, जाने कहाँ कहाँ की बातें करते है

अपनी बातों की बात छोड़ कर हम , धरती आसमाँ की बातें करते है
जो जरूरी है वो तो रह ही जाता है ,और हम यहाँ वहां की बातें करते है.....

anju(anu) choudhary said...

waah bahut khub