मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Thursday, October 20, 2011

"निरंतर" की कलम से.....: सारे मौसम देख लिए

"निरंतर" की कलम से.....: सारे मौसम देख लिए: सारे मौसम देख लिए अब किस मौसम का इंतज़ार करूँ बहारों को खिजा में बदलते देखा महकते फूलों को मुरझाते देखा अरमानों को निरंतर टूटते देखा हसरते...

0 comments: