मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Monday, October 24, 2011

"ज़िन्दगी धूप और छाया है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


दोस्त बनके हमें रुलाया है
बेसबब उसने सितम ढाया है

भूल कर प्यार-वफा की बातें
उसने दिल को बहुत दुखाया है

ज़िन्दगी के हसीन लम्हों को
उसने पल भर में ही भुलाया है

साथ उसके जो घोंसला था बुना
आँधियों ने उसे गिराया है

उसको दिन का न उजाला भाया
नग़मगी ख़्वाब पसन्द आया है

आज मेरी है कल पराई है
आती-जाती हुई ये माया है

जिसने काँटों की चुभन झेली है
उसने फूलों का नाम पाया है

“रूप”-यौवन अधिक नहीं टिकता
ज़िन्दगी धूप और छाया है

22 comments:

DR. ANWER JAMAL said...

Bahut khoob kaha hai ,
waah ...

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

लाज़वाब...दीपावली की ढेरों शुभकामनाएं

sushma 'आहुति' said...

बहुत अच्छी रचना.....

रविकर said...

बहुत खुबसूरत प्रस्तुति ||
बधाई इस प्रस्तुति पर ||

Babli said...

बहुत सुन्दर रचना !
आपको एवं आपके परिवार के सभी सदस्य को दिवाली की हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनायें !
मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
http://seawave-babli.blogspot.com/
http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

ana said...

kya bat ....bahut badhiya

वन्दना said...

बहुत सुन्दर्…………दीपावली पर्व पर आपको और आपके परिवारजनों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं

सागर said...

very nice... happy diwali...

S.N SHUKLA said...

सार्थक रचना, सुन्दर प्रस्तुति के लिए बधाई स्वीकारें.

समय- समय पर मिली आपकी प्रतिक्रियाओं , शुभकामनाओं, मार्गदर्शन और समर्थन का आभारी हूँ.

"शुभ दीपावली"
==========
मंगलमय हो शुभ 'ज्योति पर्व ; जीवन पथ हो बाधा विहीन.
परिजन, प्रियजन का मिले स्नेह, घर आयें नित खुशियाँ नवीन.
-एस . एन. शुक्ल

प्रेम सरोवर said...

आपके पोस्ट पर आना बहुत अच्छा लगा । मेरे पोस्ट पर आपका स्वागत है । दीपावली की शुभकामनाएं ।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

चर्चा मंच परिवार की ओर से दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ!
आइए आप भी हमारे साथ आज के चर्चा मंच पर दीपावली मनाइए!

अनुपमा पाठक said...

आज मेरी है कल पराई है
आती-जाती हुई ये माया है
सुन्दर!
शुभ दीपावली!

मदन शर्मा said...

बहुत सुन्दर रचना|
आपको तथा आपके परिवार को दिवाली की शुभ कामनाएं!!!!

प्रेम सरोवर said...

आपका पोस्ट अच्छा लगा । मेर नए पोस्ट "अपनी पीढ़ी को शब्द देना मामूली बात नही है " पर आपका बेसब्री से इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।

NISHA MAHARANA said...

दोस्त बनके हमें रुलाया है
बेसबब उसने सितम ढाया है.
बहुत सुन्दर.

दिगम्बर नासवा said...

बहुत खूब .. लाजवाब गज़ल है ...

JHAROKHA said...

aadarniy sir
bahut bahut hi achhi lagi aapki yah prastuti.
sach me!aisa hone par dil bahut rota hai.
behtreen
sadar naman
poonam

Minakshi Pant said...

वाह बहुत सुन्दर |

vandana said...

साथ उसके जो घोंसला था बुना
आँधियों ने उसे गिराया है...

बहुत बढ़िया गज़ल

Rajesh Kumari said...

umdaa ghazal.

amrendra "amar" said...

bahut khoob

संतोष पाण्डेय said...

आपकी कई गजलें पढ़ीं. ब्लॉग-जगत में इतनी बेहतरीन गजले कम ही लिखी जा रही है. नमन स्वीकार करें.