मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Thursday, October 20, 2011

"निरंतर" की कलम से.....: तुम्हारे अंदाज़ में अजीब सी कशिश थी

"निरंतर" की कलम से.....: तुम्हारे अंदाज़ में अजीब सी कशिश थी: इस बार तुम्हारे अंदाज़ में अजीब सी कशिश थी तुम्हारी निगाहें फर्क थी तुमसे मिल कर कुछ मुझे भी होने लगा जहन में खुशनुमा अहसास हुआ दिल का धडकन...

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