मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Thursday, October 20, 2011

दरिया दिली अच्छी लगी

दर्द पर भी प्यार आया, चोट भी अच्छी लगी |
आज पहली बार मुझको, ज़िन्दगी अच्छी लगी ||
दर्द बख्शा गम दिया, आंसू इनायत कर दिए |
मेरे मोहसिन ये तेरी, दरिया दिली अच्छी लगी ||
(साभार अज्ञात शायर)

8 comments:

sushma 'आहुति' said...

बहुत ही अच्छी.....

रविकर said...

दरिया - दिली सचमुच बढ़ी अच्छी लगी |
बस जान ले लो -
आराम आ जायेगा ||

खूबसूरत प्रस्तुति |

त्योहारों की नई श्रृंखला |
मस्ती हो खुब दीप जलें |
धनतेरस-आरोग्य- द्वितीया
दीप जलाने चले चलें ||

बहुत बहुत बधाई ||

Kunwar Kusumesh said...

अच्छी प्रस्तुति.

वन्दना said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

amrendra "amar" said...

बहुत सुन्दर लिखा है आपने बधाई

kanu..... said...

आज पहली बार मुझको, ज़िन्दगी अच्छी लगी ||
sach kahu sar aap itni jagah likhte hai ki bhatak jati hu.jab jaha jo blog blog kholti hu aapka kuch na kuch behtareen milta hai padhne ke lie....

चन्दन..... said...

आपके साथ चल कर इन शब्दों कि दुनिया में भ्रमण करने का अवसर मिला हमें...सच में आपकी ये दरियादाली अच्छी लगी हमें!