मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Monday, October 10, 2011

" इतना नहीं ख़फा होते" ( डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


ज़रा सी बात पे इतना नहीं ख़फा होते
हमेशा बात से मसले रफा-दफा होते

इबादतों के बिना तो खुदा नहीं मिलता
बिना रसूख के कोई सखा नहीं होते

जो दूसरों के घरों पर उछालते पत्थर
कभी भी उनके सलामत मकां नहीं होते

फ़लक के साथ जमीं पर भी ध्यान देते तो
वफा की राह में काँटे न बेवफा होते

अगर न “रूप” दिखाते डरावना अपना
तो दौरे-इश्क में दोनों ही बावफा होते

12 comments:

DR. ANWER JAMAL said...

Waah kya baat hai ...
sahi kaha janab aapne ...

वन्दना said...

बहुत सुन्दर भावो से सजी गज़ल्।

रविकर said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति ||
बधाई स्वीकार करें ||

Dr. shyam gupta said...

छिद्रान्वेषण ---

बिना रसूख के कोई सखा नहीं होते.....= सखा नहीं होता है ....बचन त्रुटि है ....

अगर न “रूप” दिखाते डरावना अपना.....रूप का अर्थ नाम है तो क्या दिखाते ---अर्थाभाव है ....

Dr. Ayaz Ahmad said...

Achchha kalaam hai ,
Bewajah ki baaten karna munasib nahi hai Dr. Shyam Gupta ji .

kanu..... said...

bahut sundar panktiya....

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" said...

जो दूसरों के घरों पर उछालते पत्थर

कभी भी उनके सलामत मकां नहीं होते....bahut hi sahi baat hai..sadar badhayee

Dr. shyam gupta said...

अयाज जी ...इस वैयाकरण त्रुटि में वेवजह क्या है... बताएं ...

NISHA MAHARANA said...

जो दूसरों के घरों पर उछालते पत्थर
कभी भी उनके सलामत मकां नहीं होते
bhut acha.

Santosh Kumar said...

इबादतों के बिना तो खुदा नहीं मिलता
बिना रसूख के कोई सखा नहीं होते..

अच्छी गजले (आपकी गजल जैसी) बहुत कम दिखती है. बांटने के लिए शुक्रिया.

एक नज़र मेरी कविताओं पर डालें.
www.belovedlife-santosh.blogspot.com

S.N SHUKLA said...

बहुत खूबसूरत प्रस्तुति,बधाई .


कृपया मेरे ब्लॉग पर भी पधारें.

S.N SHUKLA said...

बहुत खूबसूरत प्रस्तुति,बधाई .


कृपया मेरे ब्लॉग पर भी पधारें.