मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Monday, September 12, 2011

यदि तुम आजाते जीवन में ( महादेवी जी की पुण्य-तिथि पर.)...----डा श्याम गुप्त




.                                महीयसी  महादेवी  वर्मा जी की पुण्यतिथि पर .....उन्हीं की भाव-भूमि पर ...एक श्रृद्धा सुमन ...

यदि तुम आजाते जीवन में ,
निश्वासों में बस कर मन में |
कितने सौरभ कण से हे प्रिय!
बिखरा जाते इस जीवन में |

गाते रहते मधुरिम पल-छिन,
तेरे  ही गीतों का  विहान  |
जाने कितने वे इन्द्रधनुष,
खिल उठते नभ में बन वितान |

             खिल उठतीं कलियाँ उपवन में|
             यदि  तुम आजाते  जीवन में ||

महका  महका आता सावन,
लहरा लहरा  गाता सावन |
तन मन पींगें भरता नभ में ,
नयनों मद भर लाता सावन |

जाने  कितने  वर्षा-वसंत,
आते जाते पुष्पित होकर |
पुलकित होजाता जीवन का,
कोना कोना सुरभित होकर |

              उल्लास समाता कण कण में ,
              यदि तुम आजाते जीवन में ||

संसृति भर के सन्दर्भ सभी ,
प्राणों  की  भाषा बन् जाते |
जाने कितने नव-समीकरण,
जीवन  की  परिभाषा गाते |

पथ में  जाने  कितने दीपक,
जल उठते बनकर दीप-राग |
चलते हम तुम मन मीत बने,


बज उठते नव संगीत साज |

                 जलता राधा का प्रणय-दीप ,
                 तेरे मन के  वृन्दाबन में   |
                 यदि तुम आजाते जीवन में ||

8 comments:

रविकर said...

सुन्दर रचना आपकी, नए नए आयाम |
देत बधाई प्रेम से, हो प्रस्तुति-अविराम ||

Anil Avtaar said...

Kunwar Saahab Namaskaar.. Bahut hi acchhi rachna.. prem aur aakanchhaon ki gahan abhivyakti.. Aabhar..

Anil Avtaar said...

Gupt Sahab.. Kunwar Sahab aur Pooja Ji ke marfat aap tak pahuncha.. Bahut hi jabardast tachna.. Aabhar..

वन्दना said...

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति आज के तेताला का आकर्षण बनी है
तेताला पर अपनी पोस्ट देखियेगा और अपने विचारों से
अवगत कराइयेगा ।

http://tetalaa.blogspot.com/

सदा said...

बहुत ही अच्‍छी रचना ।

ईं.प्रदीप कुमार साहनी said...

बहत खूब | महादेवी वर्मा जी को श्रद्धांजलि |

मेरी नई रचना देखें-
**मेरी कविता:राष्ट्रभाषा हिंदी**

आशा जोगळेकर said...

जाने कितने वर्षा-वसंत,
आते जाते पुष्पित होकर |
पुलकित होजाता जीवन का,
कोना कोना सुरभित होकर |

उल्लास समाता कण कण में ,
यदि तुम आजाते जीवन में ||

बहुत सुंदर, बहुत बहुत बहुत सुंदर । महादेवी जी को श्रध्दांजली ।

डा. श्याम गुप्त said...

धन्यवाद आशा जी....रविकर, अनिल , वन्दना जी ,प्रदीप जी, सदा जी ...एवं कुंवर साहब जी...