मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Thursday, September 29, 2011

" सबको प्यारा लगता है" ( डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")



सुखद बिछौना सबको प्यारा लगता है
यह तो दुनिया भर से न्यारा लगता है

जब पूनम का चाँद झाँकता है नभ से
उपवन का कोना उजियारा लगता है

सुमनों की मुस्कान भुला देती दुखड़े
खिलता गुलशन बहुत दुलारा लगता है

जब मन पर विपदाओं की बदली छाती
तब सारा जग ही दुखियारा लगता है

देश चलाने वाले हाट नहीं जाते
उनको तो मझधार किनारा लगता है

बातों से जनता का पेट नहीं भरता
सुनने में ही प्यारा नारा लगता है

दूर-दूर से “रूप” पर्वतों का भाता
बाशिन्दों को कठिन गुजारा लगता है

10 comments:

DR. ANWER JAMAL said...

दूर-दूर से “रूप” पर्वतों का भाता
बाशिन्दों को कठिन गुजारा लगता है

यह एक सच्चाई है.
दूर से तो हर चीज सुहानी लगती है लेकिन कहते हैं न कि कब्र का हाल तो मुर्दा ही जानता है।

ana said...

bahut hi achhi gazal ....kya bat hai!!!!!!!!!!!

amrendra "amar" said...

Umda gajal prastuti ke liye badhai

anju(anu) choudhary said...

ग़ज़ल का एक एक शब्द बहुत खूबसूरत

सुमनों की मुस्कान भुला देती दुखड़े
खिलता गुलशन बहुत दुलारा लगता है.................बहुत खूब

सागर said...

umda gazal...

डा. श्याम गुप्त said...

---अच्छी गज़ल है---

----दुनिया से न्यारी वस्तु उसे कहा जाता है जो व्यक्ति वाचक संज्ञा ( प्रोपर नाउन ) होती है व तुलना होती है .....जाति वाचक बिछोना नहीं ....

----गुलशन के लिए दुलारा शब्द त्रुटिपूर्ण है ...

DR. ANWER JAMAL said...

गुलशन के लिए दुलारा शब्द त्रुटिपूर्ण है ???
आदरणीय डा. श्याम गुप्ता जी ! आपने हमें अज्ञानी और मूर्ख बताया और जो बातें हमने कहीं उन्हें बकवास और जाने क्या क्या कह दिया।
हमने बर्दाश्त किया और नहीं चाहा कि आपका साथ छोडें।
यही काम आपने इस महफिल के सद्र जनाब रूपचंद शास्त्री जी के साथ उनके ब्लॉग पर किया, कोई बात नहीं, वे अपने ब्लॉग के मालिक हैं लेकिन यहां वह हमारे अतिथि की हैसियत से मौजूद हैं और इस तरह की बातें हम अपने लिए तो बर्दाश्त कर सकते हैं लेकिन अपनी महफिल ए मुशायरा के सद्र के लिए बिल्कुल नहीं,
जिसे हम अपना सद्र बना रहे हैं और जिस मंच पर बना रहे हैं, वहां कम से कम शिष्टता के कुछ नियमों का पालन करना अनिवार्य है।
हमने एक पोस्ट भी लिखी थी
'आजाद फिलीस्तीन की संभावना कितनी है ?'
उसमें भी हमने इन्हीं बातों की तरफ आपका ध्यान दिलाया था लेकिन आपके अमल में कोई तब्दीली नहीं आई।
यह खेद का विषय है,
अतः जब तक आप इस अमल को नहीं सुधारते हैं तब तक के लिए आपके कमेंट व आपकी रचनाओं को प्रकाशन इस मंच से न हो सकेगा,
इसके लिए आपसे क्षमा प्रार्थी हैं।

POOJA... said...

waah... ek-ek sher laajawaab...
bahut acchhi ghazal...

vandana said...

उम्दा गज़ल

दिनेश पारीक said...

बहुत बढ़िया लिखा है आपने! और शानदार प्रस्तुती!
मैं आपके ब्लॉग पे देरी से आने की वजह से माफ़ी चाहूँगा मैं वैष्णोदेवी और सालासर हनुमान के दर्शन को गया हुआ था और आप से मैं आशा करता हु की आप मेरे ब्लॉग पे आके मुझे आपने विचारो से अवगत करवाएंगे और मेरे ब्लॉग के मेम्बर बनकर मुझे अनुग्रहित करे
आपको एवं आपके परिवार को क्रवाचोथ की हार्दिक शुभकामनायें!