मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Monday, September 12, 2011

इश्क़ की ताक़त

इश्क़ की एक जस्त ने तय कर दिया क़िस्सा तमाम
इस ज़मीनो आसमाँ को बेकराँ समझा था मैं

जो उर्दू नहीं जानते उनके लिए :-
जस्त यानि छलाँग , बेकराँ यानि अनंत
यह शेर बताता है कि जिन चीज़ों की इंतेहा समझना अक़्ल के बस से बाहर है , अपने रब से इश्क़ की बदौलत उनसे भी आगे देख सकता है ।

4 comments:

Kunwar Kusumesh said...

अच्छा है शेर.

sushma 'आहुति' said...

sundar....

NEELKAMAL VAISHNAW said...

आपको अग्रिम हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं आज हमारी "मातृ भाषा" का दिन है तो आज हम संकल्प करें की हम हमेशा इसकी मान रखेंगें...
आप भी मेरे ब्लाग पर आये और मुझे अपने ब्लागर साथी बनने का मौका दे मुझे ज्वाइन करके या फालो करके आप निचे लिंक में क्लिक करके मेरे ब्लाग्स में पहुच जायेंगे जरुर आये और मेरे रचना पर अपने स्नेह जरुर दर्शाए..
MADHUR VAANI कृपया यहाँ चटका लगाये
MITRA-MADHUR कृपया यहाँ चटका लगाये
BINDAAS_BAATEN कृपया यहाँ चटका लगाये

prerna argal said...

शानदार शेर .बधाई आपको