मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Wednesday, August 31, 2011

मेरी आँखों से कोई उन्हें देख ले

कोई उन्हें देख ले
मेरी मोहब्बत को
पहचान ले
निरंतर दिल में
उठ रहे
जलजले को जान ले
मेरा पैगाम उन तक
पहुंचा दे
हाल-ऐ-दिल उन्हें
बता दे
मुझे मंजिल तक
पहुंचा दे 
31-08-2011
1424-146-08-11

5 comments:

शालिनी कौशिक said...

मेरा पैगाम उन तक
पहुंचा दे
हाल-ऐ-दिल उन्हें
बता दे
मुझे मंजिल तक
पहुंचा दे
hal-e-dil kee khoobsurat abhivyakti.badhai
सांसदों के चुनाव के लिए स्नातक होना अनिवर्य

डा. श्याम गुप्त said...

...न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशंते मुखे मृगा ....

--पैगाम आप खुद ही जो दीजिए जाकर
जो इश्क है तो खुद व खुद वो चले आयंगे |
कासिद के हाथ भेज मत पैगाम मेरे दोस्त,
कौन जाने वो कदम ना बहक जायेंगे ||

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर।
गणशोत्सव की शुभकामनाएँ।

sushma 'आहुति' said...

खुबसूरत रचना....

सागर said...

behtreen abhivaykti....