मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Thursday, August 25, 2011

कुछ कलाम पानीपत के मुशायरे से

पानीपत । जामिया दारूल उलूम ट्रस्ट हाली कॉलोनी की में शायर ताहिर सदनपुरी की तरफ़ से टी. वी. कलाकार राजेन्द्र गुप्ता के सम्मान में एक मुशायरे का आयोजन किया गया। इसमें ख़ास तौर पर ये शेर ज़्यादा पसंद किए गए ।
फ़लक के चांद को मुश्किल में डाल रखा है
ये किसने खिड़की से चेहरा निकाल रखा है
शायर - इक़बाल अहमद ‘इक़बाल‘

तूने जब ख़त्म ही कर डाले हैं रिश्ते सारे
फिर ये सावन तेरी आंखों से बरसता क्यूं है
शायर - महबूब अली ‘महबूब‘

सीने से दिल निकाल कर क़दमों पे रख दिया
वो कैसे मेरे प्यार से इन्कार करेंगे
शायर - शकील सीतापुरी

वतन के हुक्मरानो , ग़लतफ़हमी में मत रहना
ये बूढ़ी हड्डियां इस मुल्क का चेहरा बदल देंगी
शायर - पंडित शिवकांत ‘विमल‘

कुछ कलाम पानीपत के मुशायरे से

2 comments:

वन्दना said...

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति आज के तेताला का आकर्षण बनी है
तेताला पर अपनी पोस्ट देखियेगा और अपने विचारों से
अवगत कराइयेगा ।

http://tetalaa.blogspot.com/

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत उम्दा।