मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Wednesday, August 24, 2011

कृष्ण जन्म ......पद...ड़ा श्याम गुप्त ...




बृज की भूमि भई है निहाल |
आनंद-कंद प्रकट भये बृज में,विरज भये बृज ग्वाल |
 सुर गन्धर्व अपछरा गावंहि, नाचहिं  दै दै ताल |
आशिस देंय विष्णु ब्रह्मा शिव, मुसुकावैं गोपाल |
 जसुमति द्वारे बजै बधायो,  ढफ ढपली खड़ताल |
पुरजन परिजन हरख मनावें, जनमु लियो नंदलाल |
बाजहिं, ढोल, मृदंग ,मंजीरा,  नाचहिं  बृज के बाल | 
सुर दुरलभ छवि निरखि-निरखि छकि श्याम' भये हैं निहाल ||

1 comments:

AlbelaKhatri.com said...

बोल बांके बिहारी लाल की जय !