मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Monday, August 22, 2011

रमज़ान की विदाई -डा. फ़ितरतुल्लाह अंसारी ‘फ़ितरत‘

हरेक मोमिन को आज ‘फ़ितरत‘ ख़याले फ़ुरक़त सता रहा है
बदल रहा है निज़ामे आलम के माहे रमज़ान जा रहा है

अजीब माहौल है जहां का उदासियां ही उदासियां हैं
ज़मीं की हालत भी है दीगर गूं फ़लक भी आंसू बहा रहा है

ज़रा तो छोड़ो ये ख्वाबे ग़फ़लत के वक्त कुछ भी नहीं है बाक़ी
कहां मयस्सर ये होगा तुम को क़ुरआं जो हाफ़िज़ सुना रहा है

ख़ुदा की रहमत बरस रही है खुला हुआ है दरे इजाबत
जो सो रहा है वो खो रहा है जो जागता है वो पा रहा है

ख़ुदा पे ईमान रखने वालों ख़ुदा का फ़रमान ये भी सुन लो
उसी को जन्नत मिलेगी इक दिन जो दिल से महवे दुआ रहा है

फ़िज़ा ए अफ़्तार में सहर में हर एक ज़र्रे में बहर ओ बर्र में
है चश्मे बीना तो देख लो तुम वो अपना जलवा दिखा रहा है

ना तुम रहोगे ना मैं रहूंगा न रह सकेगी जहां की रौनक़
ये अलविदा का पयाम ‘फ़ितरत‘ ये चश्म पुर नम सुना रहा है

डा. फ़ितरतुल्लाह अंसारी ‘फ़ितरत‘

7 comments:

शालिनी कौशिक said...

ख़ुदा पे ईमान रखने वालों ख़ुदा का फ़रमान ये भी सुन लो
उसी को जन्नत मिलेगी इक दिन जो दिल से महवे दुआ रहा है
बहुत सही व् सार्थक सन्देश प्रस्तुत करती ग़ज़ल,आभार.
@डॉ.साहब इस बार आप शब्दों के अर्थ प्रस्तुत करने में चूक गए ये सही है कि हमें यहाँ से बहुत से शब्द पता चल चुके हैं किन्तु ये कार्य तो आपको हम जैसे नौसिखियों के लिए हमेशा करना ही होगा ताकि हमारा शब्द भंडार समृद्ध हो सके.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
श्री कृष्ण जन्माष्टमी की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ।

Kunwar Kusumesh said...

ख़ुदा पे ईमान रखने वालों ख़ुदा का फ़रमान ये भी सुन लो
उसी को जन्नत मिलेगी इक दिन जो दिल से महवे दुआ रहा है.
वाह,दिल को छूने वाला शेर.मिसरा सानी"उसी को जन्नत मिलेगी इक दिन जो दिल से महवे दुआ रहा है" के महत्व को तो काश लोग समझ जायें.
शायर को मेरी तरफ से बधाई कहियेगा.

DR. ANWER JAMAL said...

@ शालिनी जी ! यह शेड्यूल पर लगाई थी यह सोचकर कि बाद में मुश्किल शब्दों के अर्थ लिख देंगे लेकिन वक्त न मिला। आप मुश्किल शब्द चुनकर भेज दीजिए कि आपको कौन से शब्द मुश्किल लग रहे हैं। उन शब्दों का अर्थ हम बता देंगे।
शुक्रिया !

@ आदरणीय शास्त्री जी ! शुक्रिया !

@ कुंवर साहब ! आपका शुक्रिया ।
शायर मोहतरम अब इस जहान ए फ़ानी में नहीं हैं।
उनकी औलाद में लड़के और लड़कियां, सभी शायर हैं और दो तो शोध कर चुके हैं। उन्हें आपका पैग़ाम ज़रूर पहुंचा दिया जाएगा।

S.N SHUKLA said...

बहुत सुन्दर रचना , सुन्दर भावाभिव्यक्ति .

कृपया मेरे ब्लॉग पर भी पधारें.

Bhushan said...

ना तुम रहोगे ना मैं रहूंगा न रह सकेगी जहां की रौनक़
ये अलविदा का पयाम ‘फ़ितरत‘ ये चश्म पुर नम सुना रहा है

बहुत ख़ूब कहा है.

prerna argal said...

आपकी पोस्ट ब्लोगर्स मीट वीकली (६) के मंच पर प्रस्तुत की गई है /आप आयें और अपने विचारों से हमें अवगत कराएँ /आप हिंदी के सेवा इसी तरह करते रहें ,यही कामना हैं /आज सोमबार को आपब्लोगर्स मीट वीकली
के मंच पर आप सादर आमंत्रित हैं /आभार /