मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Sunday, August 21, 2011

जन्माष्टमी पर एक पद...... ड़ा श्याम गुप्त ..


कैसी लीला रची गुपाल |
लूटि लूटि दधि-माखन खावें छकि हरखें ब्रिज-बाल |
क्यों हमको दधि-माखन वर्जित मथुरा नगर पठावें |
धन-संपदा ग्राम की घर की , नंदलाल समुझावें |
नीति बनाओ , दधि-माखन जो मथुरा लेकर जाय |
फोरि  गगरिया लूटि लेउ सब नगर न पहुंचन पाय |
हम बनिहें बलवान-संगठित , रक्षित सब घर-द्वार |
श्याम' होयँ संपन्न सुखी सब ,सहें न अत्याचार ||

6 comments:

सागर said...

very nice post....

शालिनी कौशिक said...

बहुत सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति.आपको कृष्ण जन्माष्टमी की बहुत बहुत शुभकामनायें

वन्दना said...

आप को कृष्ण जन्माष्टमी की बहुत बहुत शुभकामनायें

Anil Avtaar said...

वाह बहुत सुन्दर.. ऋषि -कवियों की याद आ गई...
आपको कृष्ण जन्माष्टमी की बहुत बहुत शुभकामनायें !

डा. श्याम गुप्त said...

धन्यवाद शालिनी,सागर, वंदनाजी व अवतार जी.....
---कृष्ण जन्माष्टमी की शुभ कामनाएं ....

prerna argal said...

बहुत ही सुंदर प्रस्तुति /श्रीकिसनाजी के जन्मदिन के अवसर पर अत्याचार के खिलाफ लिखी शानदार अभिब्यक्ति के लिए बधाई आपको /जन्माष्टमी की आपको बहुत बहुत शुभकामनाएं /
आप ब्लोगर्स मीट वीकली (५) के मंच पर आयें /और अपने विचारों से हमें अवगत कराएं /आप हिंदी की सेवा इसी तरह करते रहें यही कामना है /प्रत्येक सोमवार को होने वाले
" http://hbfint.blogspot.com/2011/08/5-happy-janmashtami-happy-ramazan.html"ब्लोगर्स मीट वीकली मैं आप सादर आमंत्रित हैं /