मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Thursday, August 18, 2011

भारत वर्ष हमारा.

गूगल से साभार
तू ही खल्लाक ,तू ही रज्ज़ाक,तू ही मोहसिन है हमारा.
रहे सब्ज़ाजार,महरे आलमताब भारत वर्ष हमारा.

एक आशियाँ बसाया हमने चैनो -अमन  का   ,
नाकाबिले-तकसीम यहाँ प्यार हमारा.

कुदरत के नज़ारे बसे हैं इसमें जा-ब-जा,
ये करता तज़्किरा है संसार हमारा.

मेहमान पर लुटाते हैं हम जान ये अपनी ,
है नूर बाज़ार-ए-जहाँ ये मुल्क  हमारा.

आगोश में इसके ही समां जाये ''शालिनी''
इस पर ही फ़ना हो जाये जीवन ये हमारा.

कुछ शब्द अर्थ-
खल्लाक-पैदा करने वाला,रज्ज़ाक-रोज़ी देने वाला
मोहसिन-अहसान करने वाला,सब्ज़ाजार-हरा-भरा
महरे आलमताब -सूरज,नाकाबिले-तकसीम--अविभाज्य
तज़्किरा-चर्चा,बाज़ार-ए-जहाँ--दुनिया का  बाज़ार
आगोश-गोद या बाँहों में,जा-ब-जा--जगह-जगह
शालिनी कौशिक

7 comments:

DR. ANWER JAMAL said...

ज़ुबां अच्छी है बोल अच्छे हैं तुम्हारी
रहो शाद हमेशा ये आशीर्वाद है हमारा

NEELKAMAL VAISHNAW said...

नमस्कार....
बहुत ही सुन्दर लेख है आपकी बधाई स्वीकार करें
मैं आपके ब्लाग का फालोवर हूँ क्या आपको नहीं लगता की आपको भी मेरे ब्लाग में आकर अपनी सदस्यता का समावेश करना चाहिए मुझे बहुत प्रसन्नता होगी जब आप मेरे ब्लाग पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएँगे तो आपकी आगमन की आशा में पलकें बिछाए........
आपका ब्लागर मित्र
नीलकमल वैष्णव "अनिश"

इस लिंक के द्वारा आप मेरे ब्लाग तक पहुँच सकते हैं धन्यवाद्

1- MITRA-MADHUR: ज्ञान की कुंजी ......

2- BINDAAS_BAATEN: रक्तदान ...... नीलकमल वैष्णव

3- http://neelkamal5545.blogspot.com

Dr. Ayaz Ahmad said...

बेहतरीन

शिखा कौशिक said...

शालिनी जी
देश भक्ति से भरी यह आपकी रचना बहुत सराहनीय हैं .बधाई

blog paheli no.1

शालिनी कौशिक said...

डॉ.साहब ग़ज़ल की तर्ज़ में ही आशीर्वाद देने के लिए आभार.
नीलकमल जी,डॉ.अयाज़ जी और शिखा जी उत्साह वर्धन हेतु आभार

Sadhana Vaid said...

बहुत खूबसूरत अल्फ़ाज़ में आपने अपने वतन के लिये अपने प्यार का इज़हार किया है ! बहुत सुन्दर रचना है ! बधाई एवं शुभकामनायें !

Sadhana Vaid said...
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