मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Monday, August 15, 2011

बजी मंदिर में घंटी और मस्जिद में अजां


जहाँ हर चीज है प्यारी
सभी चाहत के पुजारी
प्यारी जिसकी ज़बां
वही है मेरा हिन्दुस्तां

जहाँ ग़ालिब की ग़ज़ल है
वो प्यारा ताज महल है
प्यार का एक निशां
वही है मेरा हिन्दुस्तां

जहाँ फूलों का बिस्तर है
जहाँ अम्बर की चादर है
नजर तक फैला सागर है
सुहाना हर इक मंजर है
वो झरने और हवाएँ,
सभी मिल जुल कर गायें
प्यार का गीत जहां
वही है मेरा हिन्दुस्तां

जहां सूरज की थाली है
जहां चंदा की प्याली है
फिजा भी क्या दिलवाली है
कभी होली तो दिवाली है
वो बिंदिया चुनरी पायल
वो साडी मेहंदी काजल
रंगीला है समां
वही है मेरा हिन्दुस्तां

कही पे नदियाँ बलखाएं
कहीं पे पंछी इतरायें
बसंती झूले लहराएं
जहां अन्गिन्त हैं भाषाएं
सुबह जैसे ही चमकी
बजी मंदिर में घंटी
और मस्जिद में अजां
वही है मेरा हिन्दुस्तां
से साभार 

7 comments:

JHAROKHA said...

aadarniy sir
sabse pahle aapko hardik dhanyvaad deti hun jo aap mere blog par aaye aur mera housla badhaya.
sir
bahut hi sahi aur shandaar prastuti lagi. kash!sabke dil me yahi jajbaat ho to jaati dharm ka bhed-bhav mit kar sab ek ho jaayen.aakhir ham ek hi ishwar ke banaye hue hain to fir insaan ko kya haq banta hai jaati vaad aur dharmon ka dhidhora peetne ka ham sabke khoon ka rang ek hi hai to fir insano me antar kyon .
agar kuchh galat likh gai hun to dil se xhama chahti hun.
aapke mushayare me bahut se rang bahre hue hain jo ki dil ke antarman ko chhoo gai .bahut hi sateek aur prashanshiy prastuti ke liye punah hardik badhai swikar karen.
sadar naman
poonam

सागर said...

very nice....

sushma 'आहुति' said...

बहुत ही सुन्दर....

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर और सार्थक रचना!
आजादी की 65वीं वर्षगाँठ पर बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!

शालिनी कौशिक said...

जहाँ फूलों का बिस्तर है
जहाँ अम्बर की चादर है
नजर तक फैला सागर है
सुहाना हर इक मंजर है
वो झरने और हवाएँ,
सभी मिल जुल कर गायें
प्यार का गीत जहां
वही है मेरा हिन्दुस्तां
yusaf khan ji bahut gahrai se bharat varsh ka vishleshan kiya hai aapne.aabhar.
aur aisee shandar prastuti ke liye aabhar dr.anwar jamal ji ka.

डा. श्याम गुप्त said...

सुंदर गीत ...आज़ादी की ६४ वीं वर्ष गाँठ पर बधाई ...

DR. ANWER JAMAL said...

वाक़ई यह गीत दिल पर असर करता है।