मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Friday, August 12, 2011

हल्की-फ़ुल्की सी तक़रार करो



जब किसी से कभी भी प्यार करो
अपने दिल का तो इज़हार करो
जब किसी से कभी भी....

वक़्त रहता नहीं कभी यकसाँ 
मौक़ा मिलते उनका दीदार करो
जब किसी से कभी भी....

लौट आएगा पुराना वो शमाँ
दिल से ऐसी कुछ पुकार करो
जब किसी से कभी भी....

छुप गया है बादलों में कोई
ऐसे तारे का बस इन्तिज़ार करो
जब किसी से कभी भी....

जब कभी भी किसी से प्यार करो
हल्की-फ़ुल्की सी तक़रार करो
जब किसी से कभी भी....

3 comments:

sushma 'आहुति' said...

बहुत ही खुबसूरत पंक्तिया प्यार की तकरार की...

शालिनी कौशिक said...

जब कभी भी किसी से प्यार करो
हल्की-फ़ुल्की सी तक़रार करो
जब किसी से कभी भी....
बहुत खूब और सही भी

डा. श्याम गुप्त said...

जब कभी भी किसी से प्यार करो
हल्की-फ़ुल्की सी तक़रार करो
--वाह क्या बात है....खूबसूरत .बधाई ..और यह भी....

"इसरार व इकरार पर ही तकरार करें ,
चलो बेबात ही झगड़ो, कुछ बात करो || "