मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Wednesday, July 6, 2011

बोल कि सच ज़िंदा है अब तक Unlocked mouth


बोल, कि लब आज़ाद हैं तेरे
बोल, ज़ुबां अब तक तेरी है

तेरा सुतवां जिस्म है तेरा
बोल कि जान अब तक तेरी है

देख की आहन-गर की दुकान में
तुन्द हैं शो'ले, सुर्ख है आहन

खुलने लगे कुफ्लों के दहाने
फैला हर एक ज़ंजीर का दामन

बोल, यह थोड़ा वक़्त बहुत  है
जिस्म-ओ-जुबां की मौत से पहले

बोल कि सच ज़िंदा है अब तक
बोल, जो कुछ कहना है कह ले 

  • फैज़ अहमद 'फैज़' 
शब्दार्थ 
लब -होंठ , आहन-गर-लोहार ,  तुन्द हैं शो'ले-तेज़ हैं अंगारे , सुर्ख है आहन-लाल है लोहा 
कुफ्लों के दहाने-तालों के मुंह , 

7 comments:

शालिनी कौशिक said...

बोल कि सच ज़िंदा है अब तक
बोल, जो कुछ कहना है कह ले
faiz ahmad ''faiz'' ki ye gazal bahut sahi samay par prastut ki hai aapne anwar ji.ye himmat to aaj sabhi me honi hi chahiye.

रविकर said...

बहुत खूब...बधाई ||

शिखा कौशिक said...

sach hamesha jinda rahta hai .bahut khoob prastuti .aabhar

sushma 'आहुति' said...

very nice...

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

आपकी इस उत्कृष्ट प्रवि्ष्टी की चर्चा आज शुक्रवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल उद्देश्य से दी जा रही है!

veerubhai said...

Thanks for presenting Faiz sahab .Hindi Meanings make the ashaars meaningful . Thanks for increasing our urdu vocabulary .Transliteration is non -operative at this point of time .

डा. श्याम गुप्त said...

क्या तेरी है, क्या मेरी है |
दुनिया एक वणिज फेरी है |