मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Friday, July 15, 2011

हार है दहशत की Tech. Aggregator (News)

मौत का रक्स मुबंई में हुआ
इंतिहा हो गई थी दहशत की
ज़िंदगी फिर रवां दवां है वहां
ये यक़ीनन हार है दहशत की

-असद रज़ा
शब्दार्थ
रक्स-नाच, रवां दवां-जारी, यक़ीनन-निश्चय ही
............................................
मुशायरे के सम्मानित शायरों और पाठकों की ओर मुंबई बम हादसे के शिकार सभी लोगों के प्रति हम संवेदना व्यक्त करते हैं और प्रण करते हैं कि आतंकवादियों की देश और समाज तोड़ने की नापाक मंशा को हम हरगिज़ कभी पूरा नहीं होने देंगे। वे नफ़रत फैलाते हैं और हम मुहब्बत फैलाएंगे।
इसी के साथ एक सूचना यह भी है कि आप सभी लोगों की सुविधा के लिए अलग अलग ब्लॉगर्स की पोस्ट अब आप देख सकेंगे ‘टेक एग्रीगेटर‘ पर।
इस एग्रीगेटर पर केवल वही पोस्ट्स संकलित की जाती हैं जो कि तकनीकी जानकारी मुहैया कराती हैं।

4 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर क़ता है!

Vivek Jain said...

आपके जज्बे को सलाम,
विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

डा. श्याम गुप्त said...

वाह !! क्या बात है...
हर बार लडकर मौत से उठती ही जारही
रक्सेकुना है ज़िंदगी फिर फिर जहां |
गम औ खुशी को साथ साथ जीता है जो शहर,
वो बंबई है भारत है वो और कहाँ |

शालिनी कौशिक said...

बहुत सही प्रस्तुति आभार