मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Friday, July 8, 2011

कर जाता है....



-- कर जाता है....

दिखाता मुख की सुन्दरता,टूट जाता इक  झटके में,
वहम हम रखते हैं जितने खत्म उनको कर जाता है.

है हमने जब भी ये चाहा,करें पूरे वादे अपने,
दिखा कर अक्स हमको ये, दफ़न उनको कर जाता है.

करें हम वादे कितने भी,नहीं पूरे होते ऐसे,
दिखा कर असलियत हमको, जुबां ये बंद कर जाता है 

कहें वो आगे बढ़ हमसे ,करो मिलने का तुम वादा,
बांध हमको मजबूरी में, दगा उनको दे जाता है.
                       शालिनी कौशिक 
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7 comments:

sushma 'आहुति' said...

bhut hi sunder rachna...

रविकर said...

यही दुनिया का दस्तूर बना जाता है |
सुन्दर रचना ||

शिखा कौशिक said...

bahut khoob ...badhai

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

चारों मिसरे अच्छे हैं!
मगर इस नज़म को तो मैं आपके ब्लॉग पर पढ़ आया हूँ!

Pappu Parihar said...

माजिब तेरा इज़हार दिल के करीब है |
तेरी नज़्म में तल्खी है, नसीब के करीब है |

डा. श्याम गुप्त said...

दर्पण झूठ न बोले....रामा भेद ये मन के खोले....

DR. ANWER JAMAL said...

मैंने आपकी यह रचना यहीं पढ़ी है और बहुत अच्छा किया जो यहाँ पेश किया ।

भाव अच्छे लगे ।

आभार !