मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Thursday, July 21, 2011

हुनर ...ड़ा श्याम गुप्त...

ता उम्र घर भरते रहे हैं जिस हुनर से लोग,
अब भी लगे हैं बेचने अपने हुनर को लोग|
पीछे खड़ी है फौज बेरोज़गारों की-
उनको भी कुछ दिखाने दें अपने हुनर ये लोग |

5 comments:

शिखा कौशिक said...

क्या ये अमिताभ बच्चन जी को लक्षित करके लिखा है आपने .प्रस्तुति में निहित भाव सराहना के योग्य है .बहुत खूब .

sushma 'आहुति' said...

very nice...

शालिनी कौशिक said...

chinta n kijiye ye kam to hamari sarkar bakhoobi kar rahi hai aur janta bhi bas chand log hi hain jo hunar ke dam par 60 years se upar bhi chhaye hain .sundar prastuti badhai

Dr. shyam gupta said...

हाँ , अमिताभ बच्चन पर भी लागू होतीं है ये बात --पर मूलतः हर क्षेत्र में ऐसे लोग मौजूद हैं जो खाली समय, बोरियत,पैसा आता क्या बुरा लगता है.. आदि विभिन्न बहानों से सन्यस्त होने की उम्र में भी संसार में फंसे हुए हैं और नव-युवाओं की राह का रोड़ा बने हुए हैं....रिटायर्ड लोगों की शेयर बाज़ार की सक्रियता भी इसी भाव की उपज है .....

Dr. shyam gupta said...

धन्यवाद सुषमाजी , शिखा व शालिनी जी...