मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Saturday, July 2, 2011

नारी की चिंता - निवारण !

नारी की चिंता - "योगी"


घर में है राम की चिंता
बाहर है रावन का डर...
सीता बन कर चैन न पाए
नारी जीवन भर...


निवारण !


सीता का हरण

द्रौपदी का चीर-हरण

पुरुष का वर्चस्व -दंभ

और क्या कारण ?


त्रेता-द्वापर या कलियुग

हर युग में उदाहरण

पुरुष का वर्चस्व दंभ

और क्या कारण ?


धरती में क्यों समाई ?

बन्दूक क्यों उठाई ?

सीता हो या फूलन

धीरज क्यों करे धारण ?


स्त्री ह्रदय में आग

बदले पुरुष दिमाग

समानता का हक़

और क्या निवारण ?


शिखा कौशिक

4 comments:

शालिनी कौशिक said...

धरती में क्यों समाई ?
बन्दूक क्यों उठाई ?
सीता हो या फूलन
धीरज क्यों करे धारण ?
sahi hai stri hi kyon kare dheeraj dharan.

DR. ANWER JAMAL said...

यहाँ चहुँ ओर रावन का बजता रहता है डंका ;
वो ले जाता है हरकर प्रतिदिन सीता को लंका ;
फिर अग्नि परीक्षा माता सीता की ही ली जाती .
सारी दुनिया दुश्मन है
{विख्यात}

Nice post

sushma 'आहुति' said...

saty aur sarthak abhivakti...

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

नारी तो युगों-युगों से ही उपेक्षित रही है।
इसका कारँण पुरुष प्रधानता ही तो है!