मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Saturday, July 2, 2011

नारी की चिंता - "योगी"


घर में है राम की चिंता
बाहर है रावन का डर...
सीता बन कर चैन न पाए
नारी जीवन भर... 

8 comments:

Sachin Malhotra said...

very nice..
मेरी नयी पोस्ट पर आपका स्वागत है : Blind Devotion - सम्पूर्ण प्रेम...(Complete Love)

Pallavi said...

a very nice post but bahut kam likha hai aap ne....keep writting

शिखा कौशिक said...

stri jeevan ki yah ek trasdi hi hai .marmik prastuti .aabhar

शालिनी कौशिक said...

yahi hai nari jeevan.

DR. ANWER JAMAL said...

यहाँ चहुँ ओर रावन का बजता रहता है डंका ;
वो ले जाता है हरकर प्रतिदिन सीता को लंका ;
फिर अग्नि परीक्षा माता सीता की ही ली जाती .
सारी दुनिया दुश्मन है
{विख्यात}

Thanks

रविकर said...

MA

Dr. shyam gupta said...

--तभी आजकल सब नारियाँ --शूर्पनखा-लोलिता बनने लगी हैं...और नर -रावण, दुर्योधन, कंस...पर उन्हें यह बन् कर भी चैन कहाँ है....सतयुग में तो एक सीता का सिर्फ हरण हुआ था आज तो सभी का खूब हरण-बलात्कार होरहा है....

Dr. shyam gupta said...

--एक अनावश्यक पोस्ट.....