मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Friday, July 15, 2011

इंसानियत के दुश्मन

हमारी आँखें हैं क्यों नम कोई पता तो करे
दिए हैं किस ने हमें ग़म कोई पता तो करे
वह कौन है जिसे इंसानियत से नफ़रत है
कहाँ से आते हैं बम कोई पता तो करे
तहसीन मुनव्वर

1 comments:

शालिनी कौशिक said...

बहुत भावुक अभिव्यक्ति है अयाज़ जी आपकी .आभार