मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Wednesday, July 13, 2011

छोटी सी ज़िँदगी

काम जो करना है कल वह आज कर
वक्त की थोड़ी कहानी और है
जिस्म के सहरा पे पड़ जाएगी ख़ाक
चंद रोज़ा ज़िँदगानी और है

मतीन अमरोही

5 comments:

Kunwar Kusumesh said...

हर लिहाज़ से बेहतरीन.
जब भी अच्छे शेर ब्लॉग पर दिखेंगे मैं तारीफ करता नज़र आऊँगा..

Dr. Ayaz Ahmad said...

शुक्रिया कुँवर कुसमेश जी

prerna argal said...

jindagi ki hakikat ko bayaan karataa hukhoobsurat sher badhaai aapko.

sushma 'आहुति' said...

बेहतरीन...

Vivek Jain said...

बहुत सुंदर,
साभार,
विवेक जैन vivj2000.blogspot.com