मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Thursday, July 7, 2011

ज़मीन

हर सिम्त हर दयार है चरचा ज़मीन का
लो आ गया है कोर्ट से परचा ज़मीन का ।
पैदल ही नाप लेंगे वह उन की ज़मीन को
भारी पड़ेगा अब के तो खर्चा ज़मीन का ।
तहसीन मुनव्वर

6 comments:

veerubhai said...

very good couplets .Going to court means selling the oxen in exchange of a cat .good urdu poetry sir .

डा. श्याम गुप्त said...

sundar...

शिखा कौशिक said...

nayayik vyavastha par chot karta hai yah ...bahut khoob .aabhar

शालिनी कौशिक said...

bahut khoob.
please batayen simt ke kya mayne hain.

Dr. Ayaz Ahmad said...

shalini ji simt ka matlab disha hai

शालिनी कौशिक said...

dhanyawad dr.sahab bahut bahut.