मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Sunday, July 3, 2011

जिंदगी जीने की नयी राह एक मिल जाएगी.





है  अगर चाहत तुम्हारी सेवा परोपकार की,
तो जिंदगी समझो तुम्हारी पुरसुकूं पायेगी. 
दुनिया में किसी को मिले न मिले 
दुनियावी  झंझटों से मुक्ति मिल जाएगी.

हैं फंसे आकर अनेकों इस नरक के जाल में,
मुक्ति चाह जब उनकी आत्मा तडपायेगी     .
तब उन्हें देख तुमको हँसते मुस्कुराते हुए
जिंदगी जीने की नयी राह एक मिल जाएगी.

मोह अज्ञानवश फिर रहे भटक रहे,
मौत के आगोश में गर जिंदगी जाएगी.
अंत समय ज्ञान पाने की ललक को देखना
इच्छा अधूरी है ये मन में दबी रह जाएगी.

देख तुमको एक भी शख्स सुधर जाये अगर,
सफलता खुशियाँ तुम्हारे गले लग जाएँगी.
साथ पाकर एक और एक ग्यारह बनोगे
पीछे देखोगे साथ में भीड़ जुट जाएगी.
               शालिनी कौशिक 


4 comments:

शिखा कौशिक said...

है अगर चाहत तुम्हारी सेवा परोपकार की,
तो जिंदगी समझो तुम्हारी पुरसुकूं पायेगी.
bilkul sateek bat -keval seva hi aisa bhav hai jo manav ko manav hone ki anubooti karata hai .aabhar

रविकर said...

बहुत-बहुत बधाई |

प्रेरणा मिली |

sushma 'आहुति' said...

perna deti rachna....

डा. श्याम गुप्त said...

देख तुमको एक भी शख्स सुधर जाये अगर,
सफलता खुशियाँ तुम्हारे गले लग जाएँगी.

अच्छी रचना ..प्रेरणाप्रद...